बिहार में बच्चों की स्क्रीनिंग कर बीमारी दूर करने में मदद कर रहा चलंत चिकित्सा दलः स्वास्थ्य मंत्री

Edited By Ramanjot, Updated: 02 Jun, 2022 11:29 AM

statement of mangal pandey

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान बच्चों को बीमारियों से ग्रसित पाए जाने पर उन्हें स्वास्थ्य कार्ड देकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल के अलावा जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सीय लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शून्य से 18 वर्ष के...

पटनाः बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में चलंत चिकित्सा दल बच्चों की स्क्रीनिंग कर बीमारी दूर करने में मदद कर रहा है। उन्होंने बुधवार को कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर सरकारी तथा मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर 755 चलंत चिकित्सा दल नजर रख रहा है। कोविड काल में यह दल संक्रमण की रोकथाम में लगा था लेकिन सभी 38 जिले के सभी प्रखंडों में आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों के लिए चलंत चिकित्सा दल को पुन: पुराने कार्यों में लगा दिया गया है। चलंत चिकित्सा दल में शामिल चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों में जाकर बच्चों में विभिन्न प्रकार की बीमारियों की जांच कर रही है।


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान बच्चों को बीमारियों से ग्रसित पाए जाने पर उन्हें स्वास्थ्य कार्ड देकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल के अलावा जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सीय लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शून्य से 18 वर्ष के बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर यह पता लगाया जाता है कि उनमें किसी प्रकार की जन्मजात बीमारी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या तो नहीं है। पांडेय ने कहा कि चार श्रेणियों में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है, जिनमें जन्मजातदोष, शारीरिक दुर्बलता, चाइल्डहुड डिजिज, विकास में देरी एवं विकलांगता जैसी बीमारियां आती हैं। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में कोई कमी न रहे। चलंत चिकित्सा दल में दो आयुष चिकित्सक, एएनएम और फार्मासिस्ट होते हैं, जो जिलों में बच्चों की स्क्रीनिंग कर रोग की पहचान करते हैं।

मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में चलंत चिकित्सा दल कार्यरत हैं। इन दलों के द्वारा बच्चों की बीमारी पकड़ में आने के बाद जिले में कार्यरत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम को सूचित किया जाता है। स्क्रीनिंग से शून्य से 18 वर्ष के बिहार के बच्चे को नि:शुल्क चिकित्सा का लाभ मिल रहा है। ऐसे परिवार जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं रहते हैं, उनको भी इस योजना से लाभ मिल रहा है।

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