झारखंड में वर्षा जल रोकने में मिली कामयाबी, बंजर भूमि पर छाई हरियालीः हेंमंत सोरेन

Edited By Diksha kanojia, Updated: 21 Jul, 2021 12:26 PM

success in stopping rain water in jharkhand greenery covered barren land

इससे वर्षा जल की गति को धीमी कर उसे जमीन के अंदर पहुंचाया जा रहा है। सिर्फ एलबीसीडी ही नहीं, यहां पर ट्रेंच कम बंड (टीसीबी) के निर्माण के जरिए भी वर्षा जल को रोकने में सफलता मिली है। उपलब्ध जल का सदुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर मनरेगा के सिंचाई कूप...

रांचीः वर्षा जल बचाएं, हरियाली लाएं, समृद्धि बढ़ाएं का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विजन झारखंड में नीलाम्बर पीताम्बर जल समृद्धि योजना के तहत अब धरातल पर नजर आने लगा है। इस योजना के तहत राज्य के सैकड़ों गांवों की पहाड़ियों एवं उसके आस-पास की भूमि पर लूज बोल्डर चेक डैम (एलबीसीडी) बनाए गए हैं।

इससे वर्षा जल की गति को धीमी कर उसे जमीन के अंदर पहुंचाया जा रहा है। सिर्फ एलबीसीडी ही नहीं, यहां पर ट्रेंच कम बंड (टीसीबी) के निर्माण के जरिए भी वर्षा जल को रोकने में सफलता मिली है। उपलब्ध जल का सदुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर मनरेगा के सिंचाई कूप से किसानों द्वारा ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग भी किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में 25,000 एकड़ भूमि पर बागवानी की गई है एवं इस वर्ष लगभग 21,000 एकड़ भूमि पर बागवानी कार्य प्रगति पर है। यह गांव में मनरेगा योजना पर लोगों के विश्वास एवं इस योजना की लोकप्रियता को दर्शाता है। ग्रामीण भी सरकार की योजना में शामिल होकर जल संरक्षण की दिशा में अछ्वुत काम कर रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादन और गांव में संपन्नता बढ़ी है।

राज्य सरकार ने एक वर्ष पहले नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना की शुरूआत की थी। लगभग 4000 पंचायतों में योजना के तहत कार्य किये जा रहे हैं। कई जिलों में अबतक योजना की वजह से बंजर और टांड़ जमीन पर हरियाली दिखने लगी है। जल संरक्षण बढ़ा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों को रोजगार से भी जोड़ा जा सका है। नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना के तहत राज्य में 3,32,963 योजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 1,97,228 योजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं। शेष 1,35,735 योजनाओं पर काम जारी है। योजना से ग्रामीण क्षेत्रों की हालत में काफी सुधार आया है। कई क्षेत्रों में बंजर और टांड़ प्रकृति की भूमि में भी अब जल संरक्षण की वजह से हरियाली आ रही है। साथ ही लोग ऊपरी टांड़ जमीन का उपयोग बड़े पैमाने पर बागवानी एवं खेती के लिए करने लगे हैं।

झारखण्ड का बड़ा क्षेत्र पठारी है, जहां बारिश का ज्यादातर पानी बह कर निकाल जाता है। इसके अलावा कई जिले जैसे लातेहार, गढ़वा, पलामू में पानी की बड़ी समस्या है। इन समस्याओं के मद्देनजर इस योजना की शुरूआत की गई थी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के पानी को रोका जा सके और जल संकट को दूर किया जा सके। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा कि भूमिगत जल का संवर्धन समय की जरूरत है। योजना के माध्यम से बंजर भूमि को खेती योग्य बनाना है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सुद्दढ़ हो सके और ग्रामीणों की क्रय शक्ति में बढ़ोतरी हो। यही हमारा लक्ष्य है।

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