झारखंड के व्यापारियों ने बाजार शुल्क के विरोध में अन्य राज्यों से खरीद रोकी

Edited By Diksha kanojia, Updated: 17 May, 2022 01:34 PM

traders of jharkhand stopped purchase from other states in protest

झारखंड राज्य कृषि विपणन बोर्ड (जेएसएएमबी) के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार ने कहा, ‘‘नए नियम के प्रभाव में आ जाने के बाद जल्द नष्ट नहीं होने वाले जिंसों पर दो फीसदी और जल्द नष्ट हो जाने वाले जिंसों पर एक प्रतिशत बाजार शुल्क लगेगा।'''' कुमार ने कहा कि...

 

रांचीः झारखंड में बाजार शुल्क लगाने के प्रस्ताव के विरोध में व्यापारियों द्वारा अन्य राज्यों से उपभोक्ता जिंसों का आयात रोकने से राज्य में खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है। झारखंड राज्य कृषि उपज एवं पशुधन विपणन विधेयक, 2022 के तहत इस शुल्क को लगाने के फैसले को मार्च में विधानसभा से मंजूरी मिली थी। फिलहाल उसे राज्यपाल के अनुमोदन का इंतजार है।

झारखंड राज्य कृषि विपणन बोर्ड (जेएसएएमबी) के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार ने कहा, ‘‘नए नियम के प्रभाव में आ जाने के बाद जल्द नष्ट नहीं होने वाले जिंसों पर दो फीसदी और जल्द नष्ट हो जाने वाले जिंसों पर एक प्रतिशत बाजार शुल्क लगेगा।'' कुमार ने कहा कि ‘कृषि बाजार शुल्क' लगाने का नियम केंद्र ने लागू किया है और झारखंड सरकार ने महज उसे अपनाया है।' उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न राज्यों का अलग-अलग बाजार शुल्क ढांचा है। इस शुल्क का लक्ष्य राज्य में मंडियों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना एवं उसमें सुधार करना है।'' झारखंड में छह मंडियां हैं, रांची में दो तथा धनबाद, बोकारो, रामगढ़ एवं देवघर में एक-एक मंडी है। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एफजेसीसीआई) के बैनर तले व्यापारिक संगठन अप्रैल से ही इस प्रस्तावित बाजार शुल्क का विरोध कर रहे हैं। व्यापारियों ने दावा किया कि प्रस्तावित शुल्क से उपभोक्ता उत्पादों के दाम बढेंगे और आम लोगों पर बोझ बढ़ जाएगा।

एफजेसीसीआई के अध्यक्ष धीरज तनेजा ने कहा, ‘‘ हमने विभिन्न तरीकों से अपनी शिकायतें सरकार तक पहुंचाने का प्रयत्न किया। लेकिन सरकार उसे सुनने को तैयार नहीं है। आखिरकार हमने अन्य राज्यों से शीघ्र नष्ट होने वाले एवं शीघ्र नष्ट नहीं होने वाले खाद्य उत्पादों का आयात रोकने का फैसला किया है। कोई भी व्यापारी तबतक नया आर्डर नहीं देगा, जबतक सरकार प्रस्तावित बाजार शुल्क वापस नहीं लेती है।'' तनेजा ने कहा कि झारखंड चावल, दालें, खाद्य तेल, आलू एवं प्याज जैसी खाद्य जिंसों की आपूर्ति के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर है और उसमें बाधा आने का प्रभाव तीन-चार दिन दिनों में राज्य में महसूस किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल थोक व्यापारियों और खुदरा कारोबारियों के पास तीन-चार दिन के लिए इन चीजों का भंडार है। कुछ चीजों अभी ढुलाई के दौर में हैं। राज्य को तीन-चार दिन बाद खाद्यानों की कमी का अनुभव हो सकता है।'' उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि चीजों की कमी से कालाबाजारी होगी एवं चीजों के दाम बेतहाशा बढेंगे।

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