15 फीट गड्ढा, 1KM दूर कंट्रोल… सेना ने ऐसे निष्क्रिय किया 227KG का खतरनाक बम

Edited By SHUKDEV PRASAD, Updated: 25 Mar, 2026 05:43 PM

baharagora bomb diffuse

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा इलाके में एक बड़ा हादसा टल गया। यहां Subarnarekha River के किनारे मिले द्वितीय विश्व युद्ध काल के दो शक्तिशाली बमों को भारतीय सेना की विशेष टीम ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।

रांची: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा इलाके में एक बड़ा हादसा टल गया। यहां Subarnarekha River के किनारे मिले द्वितीय विश्व युद्ध काल के दो शक्तिशाली बमों को भारतीय सेना की विशेष टीम ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके में सख्त एहतियात बरते गए और करीब एक किलोमीटर के दायरे को खाली करा दिया गया।

227 किलो के खतरनाक बम, कई दिनों से चल रही थी तैयारी

जानकारी के मुताबिक, पहला बम करीब 9 दिन पहले और दूसरा दो दिन पहले बरामद हुआ था। दोनों बमों का वजन लगभग 227 किलोग्राम था। इन खतरनाक विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज करने के लिए Indian Army की स्पेशल टीम पिछले कई दिनों से मौके पर डटी हुई थी।

 एक किलोमीटर तक नो-मूवमेंट जोन घोषित

बम निष्क्रिय करने से पहले प्रशासन ने पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा। आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और पूरे क्षेत्र को नो-मूवमेंट जोन घोषित कर दिया गया, ताकि किसी तरह का जोखिम न रहे।

बंकर तकनीक से किया गया डिफ्यूज

सेना ने इस ऑपरेशन में ‘बंकर तकनीक’ का इस्तेमाल किया। इसके तहत जमीन में करीब 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया और बमों को उसमें रखकर बालू की बोरियों से ढक दिया गया। इस प्रक्रिया का मकसद विस्फोट के प्रभाव को सीमित करना था, जिससे आसपास के इलाके को नुकसान न पहुंचे।

ड्रोन से निगरानी, रिमोट से हुआ विस्फोट

पूरे ऑपरेशन के दौरान ड्रोन के जरिए इलाके की लगातार निगरानी की गई। बमों को रिमोट कंट्रोल तकनीक से, सुरक्षित दूरी बनाकर निष्क्रिय किया गया। पहले एक बम को डिफ्यूज किया गया, फिर कुछ समय बाद दूसरे को भी निष्क्रिय कर दिया गया।

धमाके के बाद आसमान में धुएं का गुबार

डिफ्यूज प्रक्रिया के दौरान तेज धमाके हुए, जिसके बाद आसमान में काले और सफेद धुएं के गुबार उठते देखे गए। हालांकि, सेना की सटीक योजना और सतर्कता के चलते कोई नुकसान नहीं हुआ और एक बड़ा खतरा टल गया।

यह ऑपरेशन भारतीय सेना की तकनीकी दक्षता और सतर्कता का बेहतरीन उदाहरण है। समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो ये बम आसपास के इलाके के लिए गंभीर खतरा बन सकते थे।
 

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