Edited By Ramanjot, Updated: 30 Mar, 2026 02:02 PM

खाड़ी देशों में युद्ध के चलते पेट्रोलियम और पीवीसी जैसे कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से बिहार में महंगाई का खतरा बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 'क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप' (CMG) का गठन किया है।
Bihar News: पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में गहराते युद्ध के बादलों ने अब बिहार की रसोई और निर्माण क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम पदार्थों और पीवीसी (PVC) जैसे कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बिहार सरकार 'एक्शन मोड' में आ गई है। आम जनता को महंगाई और किल्लत की मार से बचाने के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय 'क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप' (CMG) का गठन किया है।
महंगाई और आपूर्ति पर सरकार की पैनी नजर
खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे माल की कमी के कारण घर बनाने के सामान (पीवीसी पाइप) से लेकर खाद्य तेलों तक के दाम बढ़ने लगे हैं। इस संकट से निपटने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित यह समूह न केवल आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि कालाबाजारी और कृत्रिम किल्लत पर भी लगाम कसेगा।
CMG का ढांचा और प्रमुख सदस्य
राज्य सरकार ने इस समूह में शासन के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों को शामिल किया है:
अध्यक्षता: बिहार के मुख्य सचिव।
प्रमुख सदस्य: विकास आयुक्त, पुलिस महानिदेशक (DGP), गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव।
सम्बद्ध विभाग: कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, आपदा प्रबंधन और श्रम संसाधन विभाग के सचिव।
नोडल विभाग: 'खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग' को इस पूरी व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है।
आज होगी बड़ी बैठकें
संकट की गंभीरता को देखते हुए 30 मार्च शाम 4:00 बजे मुख्य सचिव के कार्यालय में CMG की पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी, जिसमें रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। शाम 5:00 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों (DM) को दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।सइस समूह की प्राथमिकता राज्य में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन को बनाए रखना और खाड़ी देशों में फंसे या वहां से लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान
युद्ध के कारण बिहार के लाखों लोग जो खाड़ी देशों में रोजगार के लिए रहते हैं, उनके परिवारों की सुरक्षा और हितों पर भी सरकार नजर रख रही है। श्रम संसाधन विभाग को विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों के डेटा और उनकी समस्याओं पर समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।