Edited By Ramanjot, Updated: 05 Sep, 2026 10:26 AM

भ्रष्टाचार के खिलाफ अनोखा संदेश देने के लिए उन्होंने 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में गधों के साथ एक रैली निकाली थी और प्रचार के दौरान हाथ में घड़ी-घंटा लेकर चलते थे।
भागलपुर: बिहार के भागलपुर निवासी देश के सबसे अनोखे चुनावी योद्धा एवं ‘धरती पकड़' के नाम से मशहूर 96 वर्षीय स्व. नागरमल बाजोरिया का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया गया। स्व. बाजोरिया लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। गुरुवार की रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
शुक्रवार को उनके पार्थिव शरीर के भागलपुर पहुंचने पर शोकाकुल परिजनों, गणमान्य लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने स्व. बाजोरिया को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। लंबे समय तक उनका राजनीतिक एवं सामाजिक सफर बड़ा दिलचस्प रहा। उन्होंने अपने जीवनकाल में 280 से अधिक चुनाव लड़े और अपनी अनूठी पहचान बनाई। स्व.बाजोरिया ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (रायबरेली), राजीव गांधी (अमेठी), अटल बिहारी वाजपेयी, संजय गांधी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे देश के बड़े राजनीतिक दिग्गजों के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए साल 1969 में वी.वी. गिरि के खिलाफ और कई दशकों बाद 2012 में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था (हालांकि 2012 में उनका नामांकन खारिज हो गया था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अनोखा संदेश देने के लिए उन्होंने 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में गधों के साथ एक रैली निकाली थी और प्रचार के दौरान हाथ में घड़ी-घंटा लेकर चलते थे। 1930 में लाहौर में जन्मे बाजोरिया का परिवार देश के विभाजन से पहले भागलपुर आकर बस गया था। उन्होंने कई जगहों पर अपने खर्च से हैंडपंप लगवाए और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक मदद की।उनके परिजनों ने बताया वे चुनाव के माध्यम से आमजन को यह संदेश देना चाहते थे कि लोकतंत्र में एक सामान्य व्यक्ति भी बड़े से बड़े नेता के सामने खड़ा हो सकता है।उन्होंने अपना आखिरी चुनाव 2019 में लड़ा था, और उनका पूरा जीवन चुनावी राजनीति और समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण बन गया।