SSC GD परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: 6 से 10 लाख में पास कराने का सौदा, सेंटर से चल रहा था रिमोट हैकिंग रैकेट

Edited By Ramanjot, Updated: 23 May, 2026 11:58 AM

major fraud in ssc gd exam deal to ensure a pass for 6 to 10 lakhs

गिरफ्तार आरोपियों में परीक्षार्थी, इनविजिलेटर, केंद्राधीक्षक और आईटी कर्मी शामिल हैं।

Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची में एसएससी परीक्षा के नाम पर चल रहे एक बड़े हाईटेक फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के भीतर सिस्टम हैकिंग, स्क्रीन मिररिंग और रिमोट एक्सेस के जरिए अभ्यर्थियों को पास कराने का संगठित खेल चल रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। 

गिरफ्तार आरोपियों में परीक्षार्थी, इनविजिलेटर, केंद्राधीक्षक और आईटी कर्मी शामिल हैं। यह मामला टाटीसिल्वे थाना क्षेत्र स्थित जीनियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित एसएससी (जीडी/कॉन्स्टेबल) सीएपीएफ परीक्षा-2026 से जुड़ा है। पुलिस सूत्रों से जानकारी के अनुसार 21 मई की सुबह करीब 10 बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर सिस्टम को हैक करने की कोशिश की जा रही है। सूचना मिलते ही रांची पुलिस सक्रिय हुई और एसएसपी के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर परीक्षा केंद्र में छापेमारी की गई। जांच के दौरान पुलिस की नजर लैब-1 में बैठे एक परीक्षार्थी पर गई। पता चला कि परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उसके कंप्यूटर सिस्टम को दोबारा री-स्टार्ट कराया गया था, जो परीक्षा नियमों के खिलाफ था।

सिस्टम को किया जा रहा था रिमोटली एक्सेस
तकनीकी जांच में सामने आया कि सिस्टम को रिमोटली एक्सेस किया जा रहा था। इससे स्क्रीन मिररिंग और सिस्टम हैकिंग की आशंका स्पष्ट हो गई। पकड़े गए अभ्यर्थी मृत्युंजय कुमार यादव और इनविजिलेटर संजीत कुमार से पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। दोनों ने बताया कि परीक्षा केंद्र के सामने सड़क पार एक किराए के मकान में पूरा सेटअप तैयार किया गया था। वहां केंद्राधीक्षक विकाश कुमार और आईटी कर्मी मुन्ना राज मौजूद रहते थे। वहीं से इंटरनेट और कंप्यूटर सिस्टम के जरिए परीक्षा केंद्र के कंप्यूटरों को हैक कर प्रश्न हल कराए जाते थे। 

बिहार के बिचौलिये ने 6 लाख में कराई थी सेटिंग 
पुलिस ने तुरंत उस ठिकाने पर छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह है, जो अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर 6 लाख से 10 लाख रुपए तक वसूलता था। गिरोह का नेटवर्क बिहार के बिचौलियों के जरिए संचालित किया जा रहा था। अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी गिरोह अपने कब्जे में रखता था, ताकि सौदा सुरक्षित रहे। गिरफ्तार परीक्षार्थी ने पुलिस को बताया कि बिहार के एक बिचौलिये ने 6 लाख रुपए में उसकी सेटिंग कराई थी। 

छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें कंप्यूटर मॉनिटर, सीपीयू, ब्रॉडबैंड डिवाइस, मोबाइल फोन, बैंक चेक, एडमिट कार्ड और मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र शामिल हैं। फिलहाल टाटीसिलवे थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112(2) तथा द पब्लिक एग्जामिनेशन (पीरिवेनशन) एक्ट, 2024 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। 

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