Edited By Ramanjot, Updated: 24 Mar, 2026 11:43 AM

सीबीआई ने बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ भ्रष्टाचार का नया मामला दर्ज किया है।
IAS Sanjeev Hans: बिहार कैडर के चर्चित और विवादित IAS अधिकारी संजीव हंस एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल की हवा खा चुके संजीव हंस के खिलाफ अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार का नया मोर्चा खोल दिया है। ताजा मामला मुंबई के एक बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले ₹1 करोड़ की रिश्वत लेने से जुड़ा है।
CBI का बड़ा खुलासा
CBI द्वारा दर्ज की गई नई FIR उस समय की है, जब संजीव हंस तत्कालीन केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के निजी सचिव (PS) के रूप में तैनात थे। जांच एजेंसी के अनुसार, मुंबई स्थित 'ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स' को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) से राहत दिलाने के लिए ₹1 करोड़ का सौदा हुआ था। रिश्वत की रकम सीधे लेने के बजाय विपुल बंसल नामक बिचौलिए और 'हवाला' नेटवर्क का सहारा लिया गया। लेनदेन के लिए बाकायदा खास कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया था। संजीव हंस ने कथित तौर पर बिल्डर के पक्ष में सुनवाई की तारीखें बदलवाईं और कंपनी के डायरेक्टर की गिरफ्तारी रोकने में मदद की।
विवादों से पुराना नाता
1997 बैच के IAS अधिकारी संजीव हंस का करियर जितना प्रभावशाली रहा, उतना ही विवादों से घिरा भी। एक महिला द्वारा यौन शोषण के आरोपों के बाद जांच शुरू हुई, तो भ्रष्टाचार की परतें खुलती गईं। अक्टूबर 2024 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया। बेउर जेल में 10 महीने बिताने और सेवा से निलंबित रहने के बाद, अक्टूबर 2025 में उन्हें पटना हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली। जनवरी 2026 में बिहार सरकार ने उन्हें सेवा में बहाल कर 'राजस्व बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य' के पद पर तैनात किया है।
बेनामी संपत्ति का अंबार
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी में संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव के गठजोड़ का खुलासा हुआ था। जांच में पाया गया कि उन्होंने करोड़ों की बेनामी संपत्ति अर्जित की है। छापेमारी के दौरान ₹11 करोड़ से अधिक नकद, भारी मात्रा में सोने-चांदी के बिस्किट और विदेशों में निवेश के दस्तावेज बरामद किए गए थे।
बचाव पक्ष का तर्क
CBI की इस नई कार्रवाई पर संजीव हंस के वकील चंगेज खान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एजेंसी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे बताया है। उनका कहना है कि यह मामला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।