Edited By Ramanjot, Updated: 01 Sep, 2026 02:19 PM

वहीं रांची, खूंटी, चतरा और सरायकेला-खरसावां में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भारी बारिश के साथ वज्रपात और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
झारखंड : झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच सोमवार सुबह से राजधानी रांची में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम केंद्र के अनुसार मंगलवार को राज्य के लगभग सभी हिस्सों में बादल छाए रहने और हल्के से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
वहीं रांची, खूंटी, चतरा और सरायकेला-खरसावां में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भारी बारिश के साथ वज्रपात और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। दो सितंबर को भी गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम समेत कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। तीन सितंबर से बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आ सकती है, हालांकि गरज, वज्रपात और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। पिछले 24 घंटे में लातेहार के महुआडांड़ में सबसे अधिक 171 मिमी बारिश दर्ज की गई। बोकारो में अधिकतम तापमान 34.1 डिग्री और लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं पुल-पुलियों के ऊपर से पानी का तेज बहाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कोल्हान प्रमंडल के जमशेदपुर, चाईबासा और चक्रधरपुर समेत आसपास के इलाकों में मेघ गर्जन के साथ बारिश का दौर जारी है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने नदी तटीय और निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है।
पलामू जिले में लगातार बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हुसैनाबाद अनुमंडल के मोहम्मदगंज से दंगवार तक तटीय इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। लोगों के नदी में जाने पर रोक लगा दी गई है। ग्रामीणों को परिवार के सदस्यों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी जा रही है। तटीय गांवों में माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।