Bihar Politics: JDU बनी ‘परिवार की पार्टी’? प्रशांत किशोर ने उठाए बड़े सवाल

Edited By Ramanjot, Updated: 26 Mar, 2026 02:07 PM

has jdu become a family party  prashant kishor raises questions

किशोर ने बुधवार को राज्य की राजधानी से करीब 150 किलोमीटर दूर मुंगेर जिले में यह टिप्पणी की। वहां उनसे पार्टी में हाल के घटनाक्रमों पर उनकी राय पूछी गई थी।

Bihar Politics: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने JD(U) के अध्यक्ष के तौर पर फिर से चुने जाकर और अपने बेटे निशांत को पार्टी में शामिल करके, उस ऊंचे आसन से खुद को नीचे उतार लिया है, जिस पर उन्होंने "पिछले 35 सालों" से खुद को बिठा रखा था। 

किशोर ने बुधवार को राज्य की राजधानी से करीब 150 किलोमीटर दूर मुंगेर जिले में यह टिप्पणी की। वहां उनसे पार्टी में हाल के घटनाक्रमों पर उनकी राय पूछी गई थी। उन्होंने कहा, "JD(U) में नीतीश कुमार हमेशा से ही सर्वोच्च नेता रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अपने पास बनाए रखना और अपने बेटे को पार्टी में शामिल करना इस बात का सबूत है कि वह उन सभी लोगों से अलग नहीं हैं, जो अपनी पार्टी को अपनी जागीर समझते हैं और जिसे वे अपनी संतानों को सौंप देना चाहते हैं।" 

नीतीश पर भाई-भतीजावाद का आरोप
किशोर ने आगे कहा, "पिछले 35 सालों से, नीतीश कुमार ने खुद को एक ऊंचे आसन पर बिठा रखा था, जबकि वे दूसरों पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते थे और खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करते थे जो समाजवाद के आदर्शों पर चलता है। लेकिन अब वह इस नैतिक श्रेष्ठता का दावा नहीं कर सकते।"पूर्व चुनावी रणनीतिकार से यह भी पूछा गया कि राज्य में होने वाले सत्ता परिवर्तन के बारे में उनकी क्या राय है, क्योंकि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

'रिश्वत' देकर चुनाव जीती NDA
किशोर ने कहा, "नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, यह NDA को तय करना है। NDA तो असल में सत्ता में आ ही नहीं पाती, अगर चुनावों से पहले मतदाताओं को खुलेआम रिश्वत न दी गई होती।" उनका इशारा पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों से पहले NDA सरकार द्वारा दी गई रियायतों की ओर था। इनमें सबसे खास थी 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना', जिसे चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कुछ ही दिन पहले शुरू किया गया था। इस योजना के तहत, एक करोड़ से ज़्यादा महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये की राशि जमा की गई, और महिला मतदाताओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले, जिससे BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन को ज़बरदस्त जीत मिली।

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