बिहार में सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ सम्पन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने सूर्य को दिया अर्घ्य

Edited By Nitika, Updated: 08 Apr, 2022 10:57 AM

mahaparv chaiti chhath concludes in bihar

बिहार में उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ सम्पन्न हो गया। बिहार में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था का महापर्व ‘चैती छठ'' 05 अप्रैल से शुरू हुआ। साल में दो बार चैत्र और कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष में...

 

पटनाः बिहार में उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ सम्पन्न हो गया। बिहार में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था का महापर्व ‘चैती छठ' 05 अप्रैल से शुरू हुआ। साल में दो बार चैत्र और कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष में महापर्व छठ व्रत होता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान भास्कर की अराधना करते हैं।


छठ महापर्व के चौथे और अंतिम दिन राजधानी पटना समेत राज्य के अन्य हिस्सों में हजारों महिला और पुरुष व्रतधारियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निराहार व्रत समाप्त हुआ और उसके बाद ही व्रतधारियों ने अन्न ग्रहण किया। 4 दिवसीय इस महापर्व के तीसरे दिन कलव्रतधारियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया था। इस बीच औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल देव के पवित्र सूर्य कुंड में चैती छठ व्रत के अवसर पर गुरुवार सुबह 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने देव के कथित त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में कतारबद्ध होकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की और सूर्य कुंड में भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया।

लोक मान्यता है कि छठ व्रत के अवसर पर देव में श्रद्धालुओं को भगवान भास्कर की साक्षात उपस्थिति की रोमांचक अनुभूति होती है और अत्यंत प्राचीन सूर्य मंदिर में आराधना करने से मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति होती है। गौरतलब है कि 4 दिवसीय यह महापर्व नहाय खाय से शुरू होता और उस दिन श्रद्धालु नदियों और तलाबों में स्नान करने के बाद शुद्ध घी में बना अरवा भोजन ग्रहण करते हैं। इस महापर्व के दूसरे दिन श्रद्धालु दिन भर बिना जलग्रहण किए उपवास रखने के बाद सूर्यास्त होने पर पूजा करते हैं और उसके बाद एक बार ही दूध और गुड़ से बनी खीर खाते हैं तथा जब तक चांद नजर आए तब तक ही पानी पीते हैं। इसके बाद से उनका करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
 

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