Edited By Harman, Updated: 03 Apr, 2026 12:54 PM

बिहार के मुजफ्फरपुर के अहियापुर में घूस लेते रंगेहाथ पकड़े गए दारोगा सदरे आलम को पांच वर्ष बाद गुरुवार को विभागीय कारर्वाई के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। तिरहुत रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) चंदन कुशवाहा ने इस संबंध में आदेश जारी किया।
Bihar News : बिहार के मुजफ्फरपुर के अहियापुर में घूस लेते रंगेहाथ पकड़े गए दारोगा सदरे आलम को पांच वर्ष बाद गुरुवार को विभागीय कारर्वाई के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। तिरहुत रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) चंदन कुशवाहा ने इस संबंध में आदेश जारी किया।
बर्खास्तगी का पत्र वैशाली के पुलिस अधीक्षक को भेज दिया गया है। वर्तमान में सदरे आलम वैशाली जिला पुलिस बल में तैनात था और उसकी पोस्टिंग हाजीपुर औद्योगिक थाना में थी। मामला 30 सितंबर 2021 का है, जब निगरानी विभाग की विशेष टीम ने जीरोमाइल चौक के समीप एक चाय दुकान पर सिपाहपुर की महिला तबस्सुम आरा से 11 हजार रुपये घूस लेते हुए सदरे आलम को रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
जानकारी के अनुसार, तबस्सुम आरा के पुत्र एक आपराधिक मामले में फंसे थे। दारोगा ने उन्हें राहत दिलाने और दोबारा गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर महिला पर दबाव बनाकर घूस की मांग की थी। महिला ने इस संबंध में निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। सत्यापन के बाद टीम ने जाल बिछाकर आरोपी दारोगा को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद सदरे आलम को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जहां से बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया और पुन: मुजफ्फरपुर पुलिस बल में योगदान दिया। इस बीच उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई, जो करीब पांच वर्षों तक चली। जांच के संचालन के लिए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पूर्वी को नियुक्त किया गया था।
जांच में दोषी पाए जाने के बाद डीआईजी ने स्पष्ट किया कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी का विभाग में बने रहना न केवल आम जनता बल्कि अन्य पुलिसकर्मियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। आदेश में कहा गया है कि सदरे आलम का आचरण सेवा के मानकों के विपरीत है, इसलिए उसे 2 अप्रैल 2026 से तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाता है।