मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- पूर्वोत्तर के विकास को गति देगी पटना-पांडु जलमार्ग से खाद्यान्न की आवाजाही

Edited By Ramanjot, Updated: 06 Feb, 2022 12:34 PM

statement of piyush goyal

पीयूष गोयल ने शनिवार को ऑनलाइन माध्यम से पटना से पांडु तक खाद्यान्न ले जा रहे एमवी लाल बहादुर शास्त्री जहाज और कलुघाट (बिहार) में टर्मिनल के लिए आधारशिला का अनावरण करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह 2350 किलोमीटर की जलमार्ग यात्रा...

पटनाः केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पटना (बिहार) से असम के पांडु तक जलमार्ग से खाद्यान्न की आवाजाही की शुरुआत पूर्वोत्तर के लिए विकास के नए द्वार खेलेगा।

पीयूष गोयल ने शनिवार को ऑनलाइन माध्यम से पटना से पांडु तक खाद्यान्न ले जा रहे एमवी लाल बहादुर शास्त्री जहाज और कलुघाट (बिहार) में टर्मिनल के लिए आधारशिला का अनावरण करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह 2350 किलोमीटर की जलमार्ग यात्रा पूर्वोत्तर के लिए एक नया द्वार खोलेगी और गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र में निर्बाध जलमार्ग कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। एमवी लाल बहादुर शास्त्री' नाम के जहाज को झंडी दिखाने से मुझे पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के ‘जय जवान जय किसान' नारे की याद आ जाती है। यह हमारे किसानों को उनकी पहुंच का विस्तार करके और उन्हें बेहतर मूल्य और बेहतर जीवन प्रदान करके आत्मानिर्भर बनाने में मददगार साबित होगा।''

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 78 करोड़ रुपए के बिहार के कालूघाट में नियोजित इंटरमॉडल टर्मिनल इस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और रोजगार के कई अवसर पैदा करेगा। इससे उत्तर बिहार की सड़कों पर परिवहन की भीड़ कम करने में भी मदद मिलेगी और इस क्षेत्र में कार्गो के परिवहन के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। पटना से यह जलमार्ग पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए खाद्यान्न और माल की आवाजाही के पारंपरिक तरीके के लिए एक व्यवहारिक विकल्प साबित हो सकता है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करेगा।

गोयल ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में निर्बाध आवागमन के लिए बंग्लादेश के साथ भारत-बंग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) मार्ग के दो हिस्सों का विकास किया जा रहा है, जिसका बजट 305 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति के तहत जलमार्ग उन सात इंजनों में से एक है, जो आर्थिक विकास और सतत विकास के लिए परिवर्तनकारी द्दष्टिकोण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजन परिवहन लागत को कम करने और विशेष रूप से किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) के लिए दूरी की बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से दक्षता हासिल करने के लिए सात इंजनों का उपयोग करना है।

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