Edited By Ramanjot, Updated: 02 Apr, 2025 06:20 PM

बिहार में विकास की लहर केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
पटना: बिहार में विकास की लहर केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उठाए गए कदम अब स्पष्ट रूप से रंग ला रहे हैं। 2005 में जहां महिला शिक्षकों की संख्या मात्र 56,498 थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.61 लाख को पार कर गया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में अब हर दूसरी शिक्षक महिला है, जो इस बदलाव की गवाही दे रहा है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
नीतीश सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाओं जैसे कि मुख्यमंत्री साइकिल योजना, बालिका पोशाक योजना और छात्रवृत्ति कार्यक्रम ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया है। इन योजनाओं के प्रभाव से न केवल स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ी है, बल्कि शिक्षण के क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। यह परिवर्तन महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
2005 में बिहार के सरकारी स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या कुल शिक्षकों की तुलना में केवल 24% थी, लेकिन 2025 तक यह आंकड़ा 44.1% को पार कर गया है। इस बदलाव का अर्थ यह है कि बिहार के सरकारी स्कूलों में हर दूसरी शिक्षक अब महिला है, जिससे शिक्षा के स्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
शिक्षकों की संख्या में 150% की वृद्धि
पिछले 28 वर्षों में बिहार में शिक्षकों की संख्या में 150% से अधिक की वृद्धि हुई है। 2005 में राज्य में कुल 2.26 लाख शिक्षक कार्यरत थे, जिनमें से महिला शिक्षकों की संख्या मात्र 56,498 थी। 2025 तक यह संख्या बढ़कर 5.91 लाख हो गई है, जिसमें महिला शिक्षकों की संख्या 2.61 लाख तक पहुंच गई है। इस तेजी से बढ़ती भागीदारी ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है।
बिहार में शिक्षकों की बंपर भर्ती
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से राज्य में तीन चरणों में कुल 2.38 लाख शिक्षकों की भर्ती की गई, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं को भी अवसर मिला। बिहार पुलिस भर्ती में 35% आरक्षण देने के बाद, प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) और मध्य (कक्षा 6 से 8) शिक्षकों की भर्ती में भी महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया, जिससे शिक्षा में उनकी भागीदारी को और मजबूती मिली।
महिला शिक्षकों की बढ़ती संख्या से लड़कियों को मिला प्रोत्साहन
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला शिक्षकों की बढ़ती संख्या ने लड़कियों को स्कूल जाने के लिए अधिक प्रेरित किया है। माता-पिता अब अपनी बेटियों को शिक्षा दिलाने के प्रति अधिक आश्वस्त हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि उनकी बेटियों को पढ़ाने वाली महिलाएं स्वयं शिक्षा के उज्ज्वल उदाहरण हैं। नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल में यह साबित हुआ है कि जब महिलाओं को अवसर दिया जाता है, तो वे सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।