रात में किसी महिला के घर में घुसना और कपड़े उठाना दुष्कर्म का प्रयास नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

Edited By Ramanjot, Updated: 08 Sep, 2026 11:09 AM

jharkhand high court

​​​​​​​चाकुलिया पुलिस ने आरोपी को 27 दिसंबर, 1999 को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी पिछली रात उसके घर में घुसा और दुष्कर्म करने के इरादे से उसके कपड़े उठाने की कोशिश की।

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा है कि केवल रात में किसी महिला के घर में प्रवेश करना और उसके कपड़े उठाना भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दुष्कर्म करने या दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना जा सकता। उच्च न्यायालय ने 26 साल पुराने मामले में दोषी की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले में बदलाव किया और मामले को दुष्कर्म के बजाय महिला की गरिमा भंग करने तथा आपराधिक बल के इस्तेमाल का मामला माना। 

न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि 'दुष्कर्म किए जाने के पर्याप्त रूप से निकट कोई विशिष्ट प्रत्यक्ष कृत्य भी भारतीय दंड संहिता के तहत दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना जाएगा।'' प्रत्यक्ष कृत्य से आशय अपराध करने की योजना को आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए वास्तविक, भौतिक कदम से है। यह फैसला 31 अगस्त को सुनाया गया था और सोमवार को जारी किया गया। दोषी ने घाटशिला सत्र अदालत द्वारा 25 जुलाई, 2006 को सुनाई गई चार साल के सश्रम कारावास की सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने सजा में बदलाव करते हुए कहा कि अपीलकर्ता मुकदमे के दौरान पहले ही करीब आठ महीने हिरासत में रह चुका है, इसलिए न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इतनी अवधि की हिरासत पर्याप्त होगी। 

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चाकुलिया पुलिस ने आरोपी को 27 दिसंबर, 1999 को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी पिछली रात उसके घर में घुसा और दुष्कर्म करने के इरादे से उसके कपड़े उठाने की कोशिश की। पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी को ''दुष्कर्म के प्रयास'' का दोषी पाया तथा आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए चार साल के कारावास की सजा सुनाई। 

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