Edited By Khushi, Updated: 29 Mar, 2026 10:29 AM

Bihar News: देश में एलपीजी (गैस) की कमी और बढ़ती कीमतों ने सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर डाला है। काम बंद होने और महंगी गैस की वजह से हजारों मजदूर अब शहर छोड़कर अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं।
Bihar News: देश में एलपीजी (गैस) की कमी और बढ़ती कीमतों ने सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर डाला है। काम बंद होने और महंगी गैस की वजह से हजारों मजदूर अब शहर छोड़कर अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं।
दिल्ली-मुंबई से बिहार लौटने को मजबूर लोग
एलपीजी संकट के कारण देशभर में काम कर रहे बिहार के प्रवासी मजदूरों की हालत खराब हो गई है। दिल्ली, मुंबई, पंजाब, गुजरात, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में मजदूर ट्रेन पकड़कर अपने गांव वापस लौट रहे हैं। पटना के दानापुर स्टेशन पर पहुंचे मजदूरों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से गैस की भारी कमी हो गई थी। इससे खाना बनाना बहुत मुश्किल हो गया। कई लोगों ने लकड़ी के चूल्हे का सहारा लिया, लेकिन बाद में लकड़ी भी मिलनी बंद हो गई। ऐसे में कई परिवारों को सूखा खाना खाकर गुजारा करना पड़ा और बच्चों के लिए खाना जुटाना भी कठिन हो गया।
गांव लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा
मजदूरों ने यह भी बताया कि गैस संकट के साथ-साथ काम भी कम होने लगा। कई फैक्ट्रियों में काम बंद हो गया, कुछ मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया गया और कई को पूरी मजदूरी भी नहीं मिली। इन हालात में उनके पास गांव लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। दिल्ली, पंजाब और अन्य शहरों में छोटे उद्योग और फैक्ट्रियां भी इस संकट से प्रभावित हुई हैं। गैस की सप्लाई रुकने के कारण कई जगह काम बंद करना पड़ा, जिससे मजदूरों और छोटे व्यापारियों दोनों को नुकसान हुआ।
हालात ठीक होने के बाद ही दोबारा शहरों में काम करने जाएंगे
मजदूरों का कहना है कि पहले जहां गैस सस्ती मिलती थी, अब उसकी कीमत बहुत बढ़ गई है। कई जगहों पर गैस 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो उनके लिए बहुत महंगी है। होटल और ढाबों में भी खाने के दाम बढ़ गए हैं, जिससे रोज कमाने-खाने वालों के लिए जीवन और मुश्किल हो गया है। अब मजदूर अपने गांव तो लौट रहे हैं, लेकिन वहां भी रोजगार की समस्या है। उनका कहना है कि हालात ठीक होने के बाद ही वे दोबारा शहरों में काम करने जाएंगे। इस संकट ने एक बार फिर दिखा दिया है कि किसी भी आपदा का सबसे ज्यादा असर गरीब और मजदूर वर्ग पर ही पड़ता है।