पटना के सुल्तान पैलेस को ध्वस्त करने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध में उतरे इतिहासकार और विद्वान

Edited By Ramanjot, Updated: 26 Jun, 2022 04:47 PM

historians protested against government proposal to demolish sultan palace

नीतीश कुमार सरकार ने हाल में घोषणा की थी कि राज्य मंत्रिमंडल ने पटना में तीन पांच सितारा होटलों के निर्माण को अनुमति दी है जिनमें से एक होटल बीरचंद पटेल मार्ग पर उस स्थान पर बनेगा जहां पर करीब एक सदी पुराना सुल्तान पैलेस इस समय खड़ा है। फैसले को...

पटनाः राजधानी पटना के बीचों बीच स्थित सुल्तान पैलेस को ध्वस्त करने के बिहार सरकार के प्रस्ताव से इतिहासकार, संरक्षणवादी और आम नागरिक स्तब्ध हैं। उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए ‘‘वास्तुकला के नमूने'' को ध्वस्त करने के बाजाय संरक्षित और पुनरुद्धार करने की अपील की है।

नीतीश कुमार सरकार ने हाल में घोषणा की थी कि राज्य मंत्रिमंडल ने पटना में तीन पांच सितारा होटलों के निर्माण को अनुमति दी है जिनमें से एक होटल बीरचंद पटेल मार्ग पर उस स्थान पर बनेगा जहां पर करीब एक सदी पुराना सुल्तान पैलेस इस समय खड़ा है। फैसले को सार्वजनिक करने के साथ ही इसका सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया। कई नागरिकों ने ‘‘इसे स्तब्ध करने वाला''और ‘ बिना सोचे समझे लिया गया'' फैसला करार दिया। वहीं कुछ ने बिहार सरकार के पूर्व के फैसले की याद दिलाई, जो कई साल पहले लिया गया था और पैलेस को ‘‘हेरिटेज होटल''में तब्दील करने की बात की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने क्यों पुराने फैसले को पलट दिया?

देश के विभिन्न हिस्सों से आम लोगों, विद्वानों और कार्यकर्ताओं ने सरकार से सुल्तान पैलेस को ध्वस्त नहीं करने की अपील की है। यह पटना में बचे रह गए कुछ महलों में से एक है। लोगों ने इस महल को विरासत पंच सितारा होटल में तब्दील करने की अपील की है। यह महल ऐतिहासिक गार्डिनर रोड (अब बीरचंद पटेल मार्ग) पर बना है जिसका निर्माण वर्ष 1922 में पटना के प्रख्यात बैरिस्टर सर सुल्तान अहमद ने कराया था। वह कुछ समय के लिए पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और वर्ष 1923 से 1930 तक पटना विश्वविद्यालय के पहले भारतीय कुलपति भी रहे। सर सुल्तान अहमद बाद में वायसराय की कार्यकारी परिषद में विधि, सूचना एवं प्रसारण के सदस्य भी नामित हुए और वह वर्ष 1930 में लंदन में हुए ऐतिहासिक गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हिस्सा लेने गए प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे।

विद्वान और पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आर.बी.पी.सिंह ने महल को ध्वस्त करने के फैसले को ‘‘स्तब्ध करने वाला'' और बिना विचारे किया गया एक असंवेदनशील कदम करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘कैसे कोई सुल्तान पैलेस जैसे वास्तुकला के शानदार नमूने और ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त करने की सोच सकता है। पिछले एक दशक में पहले ही कई ऐतहासिक इमारतों को ध्वस्त किया जा चुका है। नवीनतम घटना सदियों पुरानी पटना कलेक्ट्रेट की है जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए था। अब वे विकास के नाम पर खूबसूरत महल को गिराना चाहते हैं। यह बंद होना चाहिए और समाज को इस धरोहर को बचाने के लिए खड़ा होना चाहिए।'' दिल्ली के प्रख्यात इतिहासकार स्वपना लिड्डले और एस.इरफान हबीब ने भी पंच सितारा होटल बनाने के लिए महल को ध्वस्त करने के फैसले पर ‘‘आश्चर्य'' व्यक्ति किया है। लिड्डले ने कहा, ‘‘दुनिया भर में अब अपनी धरोहरों को प्रदर्शित किया जा रहा और पर्यटक उनसे आकर्षित हो रहे हैं लेकिन पटना जैसे शहरों में इसके विपरीत हो रहा है।''

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