हेमंत सोरेन सरकार का फैसला: रांची के मुड़मा में 256 घरों की बनेगी कुष्ठ कॉलोनी, बस्ती के लोगों ने जताई आपत्ति, जानें वजह

Edited By Khushi, Updated: 01 Oct, 2022 12:55 PM

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रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने कुष्ठ परिवार वालों के लिए 256 घरों की कुष्ठ कॉलोनी बनाने की सौगात दी है। सीएम के इस फैसले पर कैबिनेट की मुहर लग गई है। 33 करोड़ रुपये की लागत से कुष्ठ कॉलोनी का निर्माण होगा।

रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने कुष्ठ परिवार वालों के लिए 256 घरों की कुष्ठ कॉलोनी बनाने की सौगात दी है। सीएम के इस फैसले पर कैबिनेट की मुहर लग गई है। 33 करोड़ रुपये की लागत से कुष्ठ कॉलोनी का निर्माण होगा। दरअसल, रांची का वर्षों पुराना कुष्ठ परिवार बस्ती धुर्वा के योगदा सत्संग मठ के पास रहता है। मिट्टी से बनी इस बस्ती में करीब 200 कुष्ठ परिवार के लोग जैसे-तैसे अपना गुजर बसर कर रहे हैं। कई बार पक्के मकान को लेकर सरकारी सर्वे का काम हुआ, लेकिन अब सरकार ने इसे बनाने का फैसला कर लिया है।

मुड़मा में कुष्ठ कॉलोनी बनने से बच्चों की शिक्षा छूट जाएगी 
कुष्ठ परिवार के लोग कुष्ठ कॉलोनी बनने पर खुश तो हैं, लेकिन वह कुष्ठ कॉलोनी मुड़मा में बने जाने के फैसले पर वह मायूस हो गए हैं। वह चाहते हैं कि मुड़मा के बजाय धुर्वा में ही उनका आवास बने। कोई भी मुड़मा जाने को तैयार ही नहीं है। कुष्ठ कॉलोनी में रहने वाली महिला नमिता का कहना है कि उनकी आपत्ति पति के रोजगार छीन जाने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा छूट जाने को लेकर है। नमिता का कहना है कि जेब में इतने पैसे भी नहीं है कि वो इतनी दूरी रोजाना तय कर सकें। बस्ती में रहने वालों को अब तक यही पता था कि सरकार उन्हें इसी जगह पर पक्का मकान देगी, लेकिन अब उन्हें शहर से उजाड़ कर ग्रामीण क्षेत्र में भेजने की तैयारी है।

शहर से बाहर जाने से रोजगार छीन जाएगा
यहां रहने वाले रघुनाथ महतो ने बताया कि कुष्ठ कॉलिनी के लोग सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, पर वे मुड़मा के बजाय धुर्वा में ही अपने लिये आवास चाहते हैं। जब दिल्ली में शहर के अंदर कुष्ठ रोगियों के लिये कॉलोनी का निर्माण हो सकता है, तो रांची में शहर से बाहर क्यों ? वहीं, बस्ती में रहने वाले मंगल उरांव और मोहन गोस्वामी का कहना है कि कुष्ठ परिवार का गुजर बसर मंदिर और बाजार के सहारे अब तक चलता आ रहा है। जगन्नाथ मंदिर की सीढ़ियों की बात करें या हिनू मंदिर के बाहर की, आपको कुष्ठ परिवार के लोग तपती धूप से लेकर ठंड और बरसात में दिख जाएंगे। उन्होंने बताया कि भीख मांग कर या दूसरों के रहमों करम पर ही इनका पेट भरता है। जो नौजवान हैं वो मेहनत- मजदूरी कर परिवार को जिंदा रख पाने में सहयोग कर रहे हैं। अगर वो शहर से बाहर कर दिए जाएंगे, तो उनका रोजगार छीन जाएगा।

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