धनबाद: 3 मरीज डेंगू की चपेट में आए, एक का प्लेटलेट गिरकर 55 हजार पहुंचा

Edited By Khushi, Updated: 04 Oct, 2022 03:39 PM

dhanbad 3 patients caught in dengue one s platelet

धनबाद: कोरोना और लंपी वायरस के बीच अब झारखंड के धनबाद जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। यहां 3 मरीज डेंगु की चपेट में आ गए हैं। पीड़ित मरीजों में 12 साल का एक बच्चा, बीटेक का एक छात्र और एक वृद्ध है।

धनबाद: कोरोना और लंपी वायरस के बीच अब झारखंड के धनबाद जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। यहां 3 मरीज डेंगु की चपेट में आ गए हैं। पीड़ित मरीजों में 12 साल का एक बच्चा, बीटेक का एक छात्र और एक वृद्ध है। ऐसे में सभी को सावधान और इससे बचने के उपाय करने की जरूरत है।

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3 मरीज डेंगू की चपेट में आए
दरअसल, 12 साल का बच्चा जिले के एसएनएमएमसीएच में भर्ती है। बीटेक का एक छात्र जिले के एशियन जालान अस्पताल में भर्ती है। अधिकारियों ने बताया कि युवक को 3 दिनों से बुखार है। युवक हल्दिया में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा है और दुर्गा पूजा में अपने घर धनबाद आया है और वहीं, जिले के कतरास के एक निजी अस्पताल में एक वृद्ध भर्ती है। इस वृद्ध की प्लेटलेट गिरकर 55 हजार पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि मरीज का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है और ब्लड बैंक में इस ग्रुप का प्लेटलेट नहीं है। फिलहाल मरीज के लिए बी-नेगेटिव डाेनर की तलाश की जा रही है।

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संदिग्ध मानकर मरीज का किया जा रहा इलाज 
स्वास्थ्य विभाग के एचओडी डाॅ अविनाश कुमार ने बताया कि मरीज में डेंगू के लक्षण हैं और एलाइजा टेस्ट कराने काे कहा गया है। संदिग्ध मानकर मरीज का इलाज किया जा रहा है।

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डेंगू के लक्षण
डेंगू बुखार एक दर्दनाक मच्छर जनित रोग है। यह 4 प्रकार के डेंगू वायरस में से किसी एक के कारण होता है, जो एक संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, त्वचा पर हल्के लाल चकत्ते, आंखों के पीछे और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। हालांकि, कुछ लोगों को लाल और सफेद धब्बेदार चकत्ते विकसित हो सकते हैं। डेंगू से पीड़ित मरीजों को चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। आराम करने के साथ ही तरल पदार्थ पीना चाहिए।

डेंगू में बुखार होने से इसे और जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए पेरासिटामोल लिया जा सकता है। हालांकि, एस्पिरिन या इबुप्रोफेन नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि वे रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। जटिलताओं का जोखिम डेंगू के 1% से भी कम मामलों में होता है। यदि जनता को चेतावनी के संकेत ज्ञात हों तो डेंगू से होने वाली सभी मौतों से बचा जा सकता है। वहीं, संकेत मिलने पर एसडीपी सिंगल डोनर प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन को प्राथमिकता देना चाहिए।

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