Edited By Ramanjot, Updated: 04 Apr, 2025 10:36 PM

कुछ लोग जीवन में अवसरों की प्रतीक्षा में परिस्थितियों को कोसते हुए अपना समय व्यर्थ कर देते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी राह खुद बनाते हैं और सफलता की नई इबारत लिखते हैं।
पटना: कुछ लोग जीवन में अवसरों की प्रतीक्षा में परिस्थितियों को कोसते हुए अपना समय व्यर्थ कर देते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी राह खुद बनाते हैं और सफलता की नई इबारत लिखते हैं। ऐसे ही एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं बिहार के सिवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के चौकीहसन गांव निवासी रामाशंकर प्रसाद, जिन्होंने मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी मेहनत और लगन से एक नई मिसाल कायम की है।
शिक्षा और शुरुआती संघर्ष
विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रामाशंकर प्रसाद ने पारंपरिक नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार को अपनाने का फैसला किया। मत्स्य पालन के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए उन्होंने वर्ष 1984-86 में पश्चिम बंगाल से मत्स्य बीज उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने उनके अंदर आत्मविश्वास भर दिया और उन्होंने मत्स्य पालन को ही अपने करियर के रूप में अपनाने का निश्चय किया। प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने एक एकड़ का सरकारी तालाब की बंदोबस्ती ली और उसमें मछली पालन की शुरुआत की। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों को पार करते हुए सफलता की दिशा में कदम बढ़ाया। मेहनत रंग लाई और मछली पालन से होने वाली आमदनी से उन्होंने 2.5 एकड़ का निजी तालाब खुद के निवेश से तैयार किया। इस तालाब में उन्होंने मत्स्य पालन को और विस्तार दिया और अच्छी आमदनी अर्जित की।
व्यवसाय में विस्तार और सफलता
अपनी मेहनत और सूझबूझ से उन्होंने लगातार तरक्की की और आगे चलकर आठ एकड़ जमीन खरीदकर एक आधुनिक मत्स्य बीज हैचरी की स्थापना की। उनकी यह पहल जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई। अपनी तकनीकी जानकारी को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने 2006 में आंध्र प्रदेश से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में रिकॉर्ड स्थापित किया। उनकी इस उपलब्धि को बिहार सरकार ने भी सराहा। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उनकी सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 3 अक्टूबर 2008 को उन्हें देश के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा पटना के कृष्णा मेमोरियल हॉल में प्रशस्ति पत्र और शॉल देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद, 11 अक्टूबर 2012 को बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह द्वारा भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री सम्मान समिति, पटना की ओर से उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
आज की स्थिति और सामाजिक योगदान
वर्तमान में रामाशंकर प्रसाद 12 एकड़ भूमि पर मत्स्य बीज उत्पादन कर रहे हैं और उनका वार्षिक टर्नओवर लगभग एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने अपने व्यवसाय से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाया बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित किए। उनके यहां 20 से अधिक व्यक्तियों को स्थायी रोजगार प्राप्त है, जिससे कई परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। उनकी सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे अपनी उच्च गुणवत्ता वाली मत्स्य बीज तैयार कर जिले के अन्य किसानों को उपलब्ध कराते हैं, जिससे अन्य मत्स्य पालकों को भी लाभ मिल रहा है। उनकी इस सेवा भावना ने उन्हें जिले के मत्स्य पालन क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित स्थान दिलाया है।
निष्कर्ष
रामाशंकर प्रसाद की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और नए तकनीकी ज्ञान को अपनाया जाए तो कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। रामाशंकर प्रसाद ने अपनी राह खुद बनाई और मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपने अथक परिश्रम से एक नया इतिहास रचा। उनका जीवन संघर्ष, परिश्रम और सफलता की अद्वितीय मिसाल है, जो अनगिनत युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है।