नया MMS कांड: खुले मैदान में नेता का 19 मिनट 34 सेकंड वीडियो वायरल, फोरेंसिक रिपोर्ट ने मचा दी सनसनी

Edited By Ramanjot, Updated: 07 Dec, 2025 08:51 PM

madhya pradesh mms controversy

सोशल मीडिया इन दिनों मानो फेक अश्लील वीडियो का अड्डा बनता जा रहा है। हर दिन एक नया MMS, हर रात एक नया विवाद और हर हफ्ते कोई न कोई नया चेहरा इस झूठी सनसनी का शिकार हो रहा है।

19 Minute Viral MMS: सोशल मीडिया इन दिनों मानो फेक अश्लील वीडियो का अड्डा बनता जा रहा है। हर दिन एक नया MMS, हर रात एक नया विवाद और हर हफ्ते कोई न कोई नया चेहरा इस झूठी सनसनी का शिकार हो रहा है। हाल ही में 19 मिनट 34 सेकेंड वाले वायरल वीडियो ट्रेंड के बाद देशभर में AI-जनरेटेड नकली अश्लील कंटेंट की बाढ़ सी आ गई है।

काजल कुमारी, बंगाल के सोफिक–सोनाली और असम की धुनु जैसे मामलों के बाद अब मध्यप्रदेश से एक और बड़ा मामला सामने आया है जिसने पूरे माहौल को फिर से गर्म कर दिया।

MP में नया मामला—ABVP युवा नेता का वायरल MMS निकला 100% फेक

सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि अनूपपुर जिले के एक ABVP युवा नेता का अश्लील वीडियो वायरल हुआ है। देखते ही देखते वीडियो कई प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया और सनसनी मच गई। लेकिन फोरेंसिक जांच ने पूरा सच खोल दिया—वीडियो पूरी तरह फर्जी निकला और इसे एडवांस AI व एडिटिंग की मदद से तैयार किया गया था।

20 अगस्त को शुरू हुआ विवाद

कोतमा निवासी आयुष राय—जो ABVP के जिला संयोजक भी हैं—ने अमरकंटक थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक स्थानीय युवक ने अपने वेब पोर्टल और यूट्यूब चैनल पर उन्हें बदनाम करने के इरादे से यह वीडियो अपलोड किया। कुछ फेसबुक यूज़र्स ने तो इस वीडियो को “श्रीराम के नाम गमछा बिछाकर…” जैसे भड़काऊ कैप्शन्स के साथ पोस्ट कर धार्मिक भावनाएं भड़काने की भी कोशिश की।

राजनीतिक रंजिश?

आयुष का कहना है कि उनसे कुछ लोगों की राजनीतिक दुश्मनी है और फोन पर चेतावनी देने के बावजूद विरोधियों ने यह फर्जी वीडियो फैलाया। उन्होंने कहा कि ऐसे डीपफेक कई बार लोगों को मानसिक रूप से तोड़ देते हैं और कई मामलों में लोग शर्म व बदनामी से खुदकुशी तक कर लेते हैं।

फोरेंसिक रिपोर्ट—चेहरा अलग, आवाज अलग, वीडियो एडिटेड

जांच एजेंसियों ने पाया कि चेहरे की संरचना मूल फुटेज से मेल नहीं खाती, ऑडियो वेवफॉर्म अलग है, फ्रेम पैटर्न में AI एडिटिंग के स्पष्ट निशान हैं,पूरा वीडियो डीपफेक टेक्नोलॉजी से तैयार किया गया है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IT एक्ट व मानहानि की धाराओं में केस दर्ज किया है।

इससे पहले भी हो चुका है बवाल

कुछ महीने पहले मंदसौर में भाजपा नेता मनोहरलाल धाकड़ का कथित “हाईवे वाला वीडियो” भी ऐसे ही वायरल हुआ था, जिसे बाद में फर्जी बताया गया था। नया मामला सामने आते ही पुराने विवाद फिर सुर्खियों में आ गए हैं।

 इंडियन साइबर अकादमी की रिपोर्ट में भी डीपफेक की पुष्टि

अकादमी की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार— वीडियो में चेहरे का एंगल बदला गया है, आवाज से छेड़छाड़ की गई, शरीर और चेहरा दो अलग-अलग स्रोतों से जोड़े गए थे।

पत्रकारिता के छात्र आयुष राय का कहना है कि 15 अगस्त को एक छात्र समूह से हुए विवाद के बाद उनके खिलाफ साजिश रची गई। 21 सितंबर को दोबारा वीडियो अपलोड होने के बाद उन्होंने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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