टेंडर घोटाले में 3 बड़े अफसर गिरफ्तार, प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप: ED की छापेमारी में मिले थे 11 करोड़

Edited By Ramanjot, Updated: 11 Jun, 2026 10:43 AM

three senior officials arrested in tender scam

अधिकारियों ने बताया कि तीनों को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले एसवीयू ने कथित टेंडर घोटाले के सरगना रिशुश्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष...

Bihar News: बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने कथित टेंडर घोटाला मामले की जांच के सिलसिले में बुधवार को तीन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार अधिकारियों में भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास, वित्त विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। 

अधिकारियों ने बताया कि तीनों को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले एसवीयू ने कथित टेंडर घोटाले के सरगना रिशुश्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार किया था। बिहार सरकार ने पिछले सप्ताह इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। निलंबित किए गए अधिकारियों में 2017 बैच के आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर तथा 2014 बैच की एक महिला आईएएस अधिकारी शामिल हैं। 

ईडी की छापेमारी में मिली थी करोड़ों रुपए की नकदी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किए गए इन तीनों अधिकारियों से जुड़े परिसरों पर 2024 में छापेमारी की थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, तलाशी के दौरान उनके ठिकानों से 11 करोड़ रुपए से अधिक और अन्य संपत्तियां बरामद की गई थीं। ईडी ने सरकारी निविदाओं (टेंडर) में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई अभियंताओं और अधिकारियों के नाम सामने आए थे। ईडी से प्राप्त सूचनाओं और साक्ष्यों के आधार पर एसवीयू ने अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज कर जांच शुरू की थी। एसवीयू ने तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की थीं। 

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