Edited By Khushi, Updated: 05 Apr, 2025 01:03 PM

रांची: झारखंड में जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने कहा कि आयुष्मान घोटाले को लेकर झारखंड में करीब डेढ़ दर्जन स्थानों पर ईडी ने छापामारी की है और यह कोई अचानक और चौंकाने वाली घटना नहीं है। राय ने कहा कि उनके जैसा व्यक्ति लंबे समय से इसकी...
रांची: झारखंड में जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने कहा कि आयुष्मान घोटाले को लेकर झारखंड में करीब डेढ़ दर्जन स्थानों पर ईडी ने छापामारी की है और यह कोई अचानक और चौंकाने वाली घटना नहीं है। राय ने कहा कि उनके जैसा व्यक्ति लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा कर रहा था। आज जब ईडी ने छापा मारा तो उन्हें संतोष हुआ। बेशक छापामारी आय़ुष्मान के नाम पर हुई, लेकिन ईडी को इसकी तह तक जाना चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में 5 साल तक जो हुआ है, उस तक अगर ईडी नहीं पहुंचेगी तो यह बड़ा मसला नहीं बनेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईडी की छापामारी पर कोई भी टिप्पणी अनुचित है।
"पिछले 5 वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में घोटालेबाजों का एक सिंडिकेट बना हुआ है"
सरयू राय ने उम्मीद जताई कि स्वास्थ्य विभाग में घोटालेबाजों का जो सिंडिकेट था, उसका भंडाफोड़ ईडी करेगी। उन्होंने कहा कि बीते 5 साल से वह जिन मुद्दों को उठा रहे थे, उनकी पुष्टि ईडी के छापामारी से हो गई। उन्होंने कहा कि वास्तव में पिछले 5 वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में घोटालेबाजों का एक सिंडिकेट बना हुआ है जिसमें मंत्री, उनके सचिव, स्वास्थ्य विभाग के कुछ अफसर, जमशेदपुर के कुछ बिजनेसमैन और कुछ डॉक्टर और अस्पताल भी शामिल हैं। राय ने कहा कि इस छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बात है पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सचिव रहे ओम प्रकाश सिंह उर्फ गुड्डू के निवास स्थान पर छापेमारी। स्वास्थ्य विभाग में एक धारणा बनी थी कि ओम प्रकाश सिंह जो कहते हैं, वही बन्ना गुप्ता करते हैं। ओम प्रकाश सिंह का आदेश स्वास्थ्य विभाग में अनाधिकृत रूप से चलता था। स्वास्थ्य विभाग में जो इस मनोभाव के लोग थे, उन लोगों ने एक गैंग बना लिया था। राय ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की गड़बड़ियों को लेकर कई बार विधानसभा में मामला उठाया। कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच कमेटी बन गई, लेकिन जांच नहीं हुई। कोई रिपोर्ट टेबल नहीं हुआ। सूचना के अधिकार के तहत दो माह पहले उन्होंने कुछ सूचनाएं मांगी, नहीं मिली। आज तक नहीं मिली। इससे साबित होता है कि वो लोग चीजों को छुपाना चाहते हैं।
"कुछ अस्पताल फर्जी हैं, लेकिन उन्हें आयुष्मान में जोड़ लिया गया है"
राय ने कहा कि चूंकि उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो उनके ही खिलाफ चार-पांच दर्ज कर दिये गये। ये मुकदमे स्वास्थ्य विभाग ने किये। उनमें से दो-तीन मुकदमों में ओम प्रकाश सिंह गवाह हैं। ये लोग रांची पुलिस पर दबाव डालते रहे हैं कि उन्हें (श्री राय को) गिरफ्तार किया जाए। हटिया का जो डीएसपी सही तरीके से काम कर रहा था, उसको बदलवा दिया गया और एक ''नामी'' डीएसपी को ये लोग ले आए। उन्होंने आंख मूंदकर उनके खिलाफ मामले को ट्रू कर दिया। आज राय उस मामले में जमानत पर हैं। एक मामले में अदालत ने उनके खिलाफ कोई भी पीड़क कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। ऐसे में, स्वास्थ्य विभाग में लोगों ने यह मान लिया था कि जो भी वो लोग करेंगे, कोई विरोध नहीं करेगा। जो विरोध करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से ही आयुष्मान में गड़बड़ी की बातें सामने आ रही थीं। तब भी यह चर्चा होती थी कि जमशेदपुर के कुछ डॉक्टर और कुछ अस्पताल फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। आज भी 40 करोड़ से अधिक रुपये फर्जी मरीजों का रुका हुआ है। इन लोगों ने लूट की साजिश रची थी। कुछ अस्पताल फर्जी हैं, लेकिन उन्हें आयुष्मान में जोड़ लिया गया है और कुछ अस्पताल अगर सही हैं तो उसमें भी मरीजों का इलाज हो रहा है और पैसे की उगाही हो रही है।
राय ने कहा कि मरीज है ही नहीं, लेकिन उसके नाम पर बिल बन रहा है और पैसे उठाये जा रहे हैं। झारखंड सरकार ने झारखंड आरोग्य सोसाइटी बनाई है। उसकी भी इसमें बड़ी भूमिका है। दवा और उपकरणों की खरीद के लिए एक कार्पोरेशन बना है। उसकी भी बड़ी भूमिका है। यह कार्पोरेशन दवाओं की हेराफेरी करता है। राय ने कहा कि नेक्सस में शामिल लोगों ने सुनियोजित तरीके से उस पैसे का वारा-न्यारा करने की साजिश रची, जो भारत सरकार मरीजों की सहायता के लिए दे रही थी। ईडी ने धनबाद में छापेमारी भी की। विधानसभा में इस पर कई बार चर्चा भी हुई थी। हम लोगों को लग रहा था कि ईडी या सीबीआई इसे गंभीरता से नहीं ले रही है, लेकिन इन एजेंसियों ने काम शुरु कर दिया था इस पर। आज उसी का नतीजा है कि डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्थानों पर ईडी की छापेमारी हुई।