Edited By Khushi, Updated: 30 Aug, 2025 12:48 PM

रांची: झारखंड में आजसू पार्टी प्रमुख एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लाया गया झारखण्ड विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पूरी तरह से जनविरोधी और असंवैधानिक है। महतो ने कहा कि आजसू पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है।
रांची: झारखंड में आजसू पार्टी प्रमुख एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लाया गया झारखण्ड विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पूरी तरह से जनविरोधी और असंवैधानिक है। महतो ने कहा कि आजसू पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है।
महतो ने कहा कि जनता को संविधान की दुहाई देने वाली झामुमो-कांग्रेस ही आज संविधान का गला घोंट रही है। कहा कि राज्य सरकार यह मत भूले कि छात्र-युवा शक्ति के त्याग एवं बलिदान की बदौलत झारखंड राज्य का निर्माण हुआ है। हेमंत सरकार इस काले विधेयक को लाकर छात्रों तथा विश्वविद्यालयों के अधिकारों को कुचलना चाहती है। इसे कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा। महतो ने कहा कि झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2025 छात्रों, शिक्षकों, शैक्षणिक जगत और जनमानस के हित में नहीं है। यह विधेयक राज्यपाल के शैक्षणिक विशेषाधिकारों पर हमला है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकृत कर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीनने और उच्च शिक्षा जगत में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ाने की साजिश है। इस विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए। महतो ने कहा कि राज्य सरकार यह मत भूलें कि छात्र-युवा शक्ति के त्याग एवं बलिदान की बदौलत झारखंड राज्य का निर्माण हुआ है। हेमंत सरकार इस काले विधेयक को लाकर छात्रों तथा विश्वविद्यालयों के अधिकारों को कुचलना चाहती है। इसे कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महतो ने कहा कि हेमंत सरकार शिक्षा के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ाने का काम कर रही है, क्योंकि उसकी नीतियों को छात्रों-युवाओं का समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के अधिकारों का हनन होगा और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रभावित होगी। झारखण्ड की स्थानीय आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को नजरअंदाज करते हुए यह छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे। इस विधेयक के अनुसार छात्र संघ को विश्वविद्यालय के कुलपति और महाविद्यालय के प्राचार्य अपने आधार पर चुनेंगे। यह पुरी तरीके से असंवैधानिक है और लोकतंत्र की हत्या है। महतो ने कहा कि शिक्षा झारखण्ड की अस्मिता और भविष्य से जुड़ा विषय है। इस पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं