बड़ी कार्रवाई: पांच निर्माण कंपनियां 10 साल के लिए ब्लैकलिस्ट, यहां देखें सूची

Edited By Ramanjot, Updated: 08 Jun, 2026 03:26 PM

5 major construction companies blacklisted for 10 years check the list

निविदा प्रक्रिया में जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने, कार्यादेश की शर्तों का पालन नहीं करने तथा निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में विभाग ने राज्य के पांच संवेदकों एवं निर्माण एजेंसियों को तत्काल प्रभाव से दस वर्षों के लिए...

Bihar News: ग्रामीण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और अनुबंधीय शर्तों के उल्लंघन के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की है। निविदा प्रक्रिया में जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने, कार्यादेश की शर्तों का पालन नहीं करने तथा निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में विभाग ने राज्य के पांच संवेदकों एवं निर्माण एजेंसियों को तत्काल प्रभाव से दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। विभागीय जांच में यह प्रमाणित हुआ कि कुछ संवेदकों ने निविदा प्राप्त करने के उद्देश्य से फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र एवं भ्रामक अभिलेख प्रस्तुत किए थे।

 

  • इस क्रम में कार्य प्रमंडल, सीवान-01 के अधीन निविदा संख्या-145960 में जाली अनुभव प्रमाण-पत्र संलग्न करने के मामले में निर्माण एजेंसी को दस वर्षों के लिए कालीसूचीबद्ध किया गया है। विभाग द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में एजेंसी ने बिना पर्याप्त साक्ष्य के बीमारी का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे विभाग ने असंतोषजनक मानते हुए अस्वीकार कर दिया। 

 

  • इसी प्रकार, कार्य प्रमंडल महनार के अंतर्गत निविदा संख्या-143461 में फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के मामले में वैशाली जिले के संवेदक को भी दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है। विभागीय जांच के दौरान संवेदक द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण में त्रुटि की जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर पर डालने का प्रयास किया गया, जिसे विभाग ने स्वीकार नहीं किया। 

 

  • इसके अतिरिक्त, भवन निर्माण विभाग के अधीन सन्हौला (भागलपुर) में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवन निर्माण कार्य की निविदा में जाली अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के मामले में कटिहार जिले के संवेदक के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की गई है। विभाग ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेज तथ्यात्मक रूप से गलत थे और स्पष्टीकरण में दी गई दलीलें संतोषजनक नहीं थीं। फलस्वरूप उन्हें भी दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया है। 

 

  • फर्जीवाड़े के मामलों के अतिरिक्त, विभाग ने निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की है। सारण जिले की निर्माण एजेंसी को सोनपुर कार्य प्रमंडल के अंतर्गत निर्मित ग्रामीण पथ के पंचवर्षीय अनुरक्षण दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने तथा विभागीय पत्राचार का उत्तर नहीं देने के कारण दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है। 

 

  • वहीं, पूर्णिया जिले की निर्माण एजेंसी के विरुद्ध मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना की दो निविदाओं में कार्यादेश निर्गत होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा नहीं करने तथा एकरारनामा निष्पादित नहीं करने के कारण कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में यह पाया गया कि एजेंसी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण तथ्यात्मक एवं तकनीकी रूप से असंगत था। परिणामस्वरूप एजेंसी की बिड सिक्योरिटी जब्त करते हुए उसे भी दस वर्षों के लिए कालीसूचीबद्ध कर दिया गया है। 

 

ग्रामीण कार्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि विकास योजनाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निविदा प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, अनुबंधीय शर्तों का उल्लंघन अथवा अनुरक्षण कार्यों में शिथिलता बरतने वाले संवेदकों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 

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