Edited By Rahul Rana, Updated: 25 Aug, 2026 03:17 PM

बिहार में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज है। इस बीच आरक्षण को लेकर पटना हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
पटना: बिहार में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज है। इस बीच आरक्षण को लेकर पटना हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालन ने स्पष्ट किया कि मुखिया पद पर आरक्षण बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 15 की उपधारा 5 के तहत लागू होगा। बिहार आरक्षण कानून के प्रावधान पंचायत चुनाव में लागू नहीं होंगे। न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की एकलपीठ ने कहा कि 1991 का आरक्षण कानून मुख्य रूप से राज्य सरकार के अधीन पदों और सेवाओं में आरक्षण से संबंधित है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचित मुखिया को पद से हटाने के आदेश को भी रद्द कर दिया।
राज्य निर्वाचन आयोग पर उठे सवाल
न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की एकलपीठ ने एक याचिका पर निर्णय देते हुए बिहार राज्य निर्वाचन आयोग और जाति छानबीन समिति की कार्यशैली पर कई सवाल उठाए। अदालन ने माना कि समिति ने गलत कानून का प्रयोग करके निर्वाचित प्रतिनिधि को पद से हटाया था।
कोर्ट के फैसले स्पष्ट हुई तस्वीरें
पटना हाई कोर्ट के इस फैसले से बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई। मुखिया की सीट के आरक्षण से जुड़े मामलों में अब बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 15(5) को प्रमुख आधार माना जाएगा। इस तरह से हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि नौकरी का आरक्षण अलग, चुनाव का आरक्षण अलग और दोनों के नियम भी अलग हैं।