Edited By Swati Sharma, Updated: 29 Aug, 2025 05:15 PM
Minapur Assembly Seat: मीनापुर विधानसभा सीट वैशाली लोकसभा के तहत आता है...1951 में मीनापुर सीट अस्तित्व में आया था। 1951 में इस सीट पर हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी कैंडिडेट जनक सिंह ने जीत हासिल की थी। 1957 और 1962 के चुनाव में भी जनक सिंह...
Minapur Assembly Seat: मीनापुर विधानसभा सीट वैशाली लोकसभा के तहत आता है...1951 में मीनापुर सीट अस्तित्व में आया था। 1951 में इस सीट पर हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी कैंडिडेट जनक सिंह ने जीत हासिल की थी। 1957 और 1962 के चुनाव में भी जनक सिंह ने ही मीनापुर में अपना वर्चस्व बरकरार रखा था....वहीं 1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने मीनापुर में कांग्रेस के वर्चस्व को तोड़ दिया था।1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के कैंडिडेट एम आर के दास ने जनता का भरोसा हासिल करने में कामयाबी हासिल की थी, लेकिन 1969 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी कैंडिडेट जनक सिंह ने एक बार फिर मीनापुर सीट पर जीत का परचम लहरा दिया था। 1972 में हुए चुनाव में मीनापुर सीट से एनसीओ कैंडिडेट महंथ रामकिशोर दास ने विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया था।
वहीं, 1977 में जेएनपी के कैंडिडेट नगेंद्र प्रसाद सिंह ने मीनापुर की जनता का भरोसा जीत लिया था। 1980 में मीनापुर में सीपीआई कैंडिडेट जनकधारी प्रसाद कुशवाहा ने विरोधियों को मात दे दिया था। 1985 में मीनापुर सीट से लोकदल की टिकट पर हिंद केसरी यादव ने जनता का भरोसा जीत लिया था। 1990 और 1995 में मीनापुर सीट से हिंद केसरी यादव लगातार दो बार जनता दल की टिकट पर विरोधियों को मात देने में कामयाब रहे। वहीं 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलीय कैंडिडेट दिनेश प्रसाद ने मीनापुर में जीत का परचम लहरा दिया था। वहीं 2005 के अक्टूबर महीने में हुए चुनाव में दिनेश प्रसाद जेडीयू की टिकट पर एक बार फिर मीनापुर से विधानसभा पहुंचने में कामयाब हुए। 2010 में दिनेश प्रसाद जेडीयू की टिकट पर एक बार फिर मीनापुर से विधानसभा पहुंचने में कामयाब हुए थे। 2015 और 2020 में मीनापुर सीट से आरजेडी की टिकट पर राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव ने जीत हासिल की थी।
Minapur Assembly Seat Result 2020।। एक नजर 2020 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर
वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में मीनापुर सीट पर आरजेडी कैंडिडेट राजीव कुमार ने जीत का परचम लहराया था। राजीव कुमार को 60 हजार 18 वोट मिला था तो जेडीयू उम्मीदवार मनोज कुमार को 44 हजार पांच सौ छह वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। राजीव कुमार ने मनोज कुमार को 15 हजार पांच सौ 12 वोट के मार्जिन से हराया था। वहीं एलजेपी उम्मीदवार अजय कुमार 43 हजार चार सौ 96 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

Minapur Assembly Seat Result 2015।। एक नजर 2015 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर
वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में मीनापुर सीट से आरजेडी कैंडिडेट राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव ने जीत हासिल की थी। राजीव कुमार को 80 हजार सात सौ 90 वोट मिला था तो बीजेपी कैंडिडेट अजय कुमार को 56 हजार आठ सौ 50 वोट ही मिल पाया था। इस तरह से राजीव कुमार ने अजय कुमार को 23 हजार नौ सौ 40 वोट के बड़े अंतर से हरा दिया था। वहीं निर्दलीय कैंडिडेट मोहम्मद सदरूल खान, 4 हजार नौ सौ 34 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

Minapur Assembly Seat Result 2010।। एक नजर 2010 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर
वहीं 2010 के विधानसभा चुनाव में मीनापुर सीट से जेडीयू की टिकट पर दिनेश प्रसाद ने जीत हासिल की थी। दिनेश प्रसाद को 42 हजार दो सौ 86 वोट मिला था तो आरजेडी कैंडिडेट राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव को 36 हजार आठ सौ 84 वोट मिला था। इस तरह से दिनेश प्रसाद ने राजीव कुमार को 5 हजार चार सौ दो वोट के अंतर से हरा दिया था। वहीं कांग्रेसी कैंडिडेट सकलदेव सहनी, 15 हजार तीन सौ 46 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

Minapur Assembly Seat Result 2005।। एक नजर 2005 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर
वहीं 2005 के विधानसभा चुनाव में मीनापुर सीट से जेडीयू कैंडिडेट दिनेश प्रसाद ने जीत हासिल की थी। दिनेश प्रसाद को 40 हजार 70 वोट मिला था तो आरजेडी कैंडिडेट हिंद केसरी यादव को 28 हजार पांच सौ 66 वोट ही मिल पाया था। इस तरह से दिनेश प्रसाद ने हिंद केसरी यादव को 11 हजार पांच सौ चार वोट से हरा दिया था। वहीं सीपीआई कैंडिडेट जगदीश प्रसाद गुप्ता, 12 हजार 2 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे थे।

मीनापुर विधानसभा सीट पर मुस्लिम, कोइरी और यादव वोटर अच्छी खासी संख्या में हैं। वहीं पासवान, रविदास और राजपूत वोटरों की भी अच्छी संख्या है। पिछली बार यहां से आरजेडी उम्मीदवार की जीत में एलजेपी कैंडिडेट की बड़ी अहम भूमिका रही थी। एलजेपी कैंडिडेट ने 43 हजार चार सौ 96 वोट लाकर जेडीयू उम्मीदवार के वोट बैंक में बड़ा सेंध लगा दिया था। इस बार लोजपा अगर अपना वोट जेडीयू उम्मीदवार के खाते में ट्रांसफर कराने में सफल रही तो ये सीट आरजेडी के खाते से निकल भी सकती है।