Edited By SHUKDEV PRASAD, Updated: 21 Mar, 2026 09:28 PM

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। Deepak Prakash ने शनिवार को कहा कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे और परिसीमन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
पटना: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। Deepak Prakash ने शनिवार को कहा कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे और परिसीमन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
चुनाव प्रक्रिया में नहीं होगा बदलाव
मंत्री ने साफ किया कि प्रमुख और उप-प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था पिछले कई वर्षों से लागू है और इसमें बदलाव की कोई जरूरत नहीं समझी गई है।
नई आरक्षण सूची होगी लागू
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि 2026 पंचायत चुनाव के लिए नई आरक्षण सूची लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य सभी वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देना है, ताकि पंचायत स्तर पर भागीदारी और मजबूत हो सके।
गया दौरे पर मंत्री ने लिया जायजा
Gaya के दौरे पर पहुंचे मंत्री ने टंकप्पा प्रखंड के बरसाउना गांव में पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य का निरीक्षण किया।
- भूमि से जुड़े मामलों की समीक्षा की
- अधिकारियों को काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए
- स्थानीय विरोध के कारण रुका हुआ प्रोजेक्ट फिर से शुरू कराने पर जोर
CM नीतीश कुमार पर दिया बयान
राजनीतिक सवालों पर जवाब देते हुए Deepak Prakash ने कहा कि राज्य का नेतृत्व Nitish Kumar के हाथों में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार के विकास में मुख्यमंत्री की अहम भूमिका रही है और आगे भी वही नेतृत्व करेंगे।
ईद कार्यक्रम पर भी दी सफाई
पटना के गांधी मैदान में आयोजित ईद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर मंत्री ने कहा कि वे सरकारी कार्यों में व्यस्त थे। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निशांत कुमार की उपस्थिति को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय राजनीति पर भी बोले मंत्री
मंत्री ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वहां के मतदाता भविष्य में बेहतर विकल्प चुन सकते हैं।
सरकार का संदेश साफ
सरकार ने पंचायत चुनाव को समय पर कराने और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के जरिए स्थानीय शासन को और मजबूत व समावेशी बनाने का संकेत दिया है।