पटना का ‘एकता भवन’ ढहा, शहर ने खोया एक अनोखा लैंडमार्क...1986 में रखी गई थी नींव

Edited By Ramanjot, Updated: 15 Apr, 2026 06:11 PM

patna s  ekta bhawan  collapses

बिहार सरकार के इस हालिया कदम की संरक्षण वास्तुकारों के एक वर्ग और राजधानी के कई निवासियों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि इस इमारत को ध्वस्त करने के बजाय इसे नई परियोजना में शामिल किया जा सकता था,

Patna News: आधुनिक युग की विशिष्ट वास्तुकला शैली को दर्शाने वाले आकर्षक डिजाइन से सुसज्जित पटना के लगभग 40 वर्ष पुराने 'एकता भवन' को ध्वस्त कर दिया गया है। यह इमारत स्थानीय लोगों के बीच विस्मय और कौतूहल का केंद्र हुआ करती थी। इसके विशिष्ट अग्रभाग के कारण कई लोगों द्वारा 'सैटेलाइट बिल्डिंग' कहा जाने वाला यह ढांचा शहर के बीचोंबीच गांधी मैदान के पास गंगा के किनारे स्थित था और कुछ सप्ताह पहले इसे ढहा दिया गया, ताकि प्रस्तावित 'पटना हाट' के लिए जगह बनाई जा सके। 

9 सितंबर 1986 को रखी गई थी आधारशिला 
बिहार सरकार के इस हालिया कदम की संरक्षण वास्तुकारों के एक वर्ग और राजधानी के कई निवासियों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि इस इमारत को ध्वस्त करने के बजाय इसे नई परियोजना में शामिल किया जा सकता था, क्योंकि यह एक 'लैंडमार्क' के रूप में अलग पहचान रखती थी। अभिलेखीय रिकॉर्ड के अनुसार, पटना आयुक्त कार्यालय के सामने स्थित 'इंदिरा गांधी एकता भवन' की आधारशिला नौ सितंबर 1986 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने रखी थी। इस मौके पर उन्होंने भाषण भी दिया था। 

हालांकि, इमारत की मुख्य संरचना वर्षों में बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन आंतरिक सज्जा और अन्य सिविल-इलेक्ट्रिकल कार्यों का काम कभी पूरा नहीं हो सका, जिसके कारण यह ऐतिहासिक अशोक राजपथ पर "जिज्ञासा के एक आधुनिक स्मारक" के रूप में खड़ी रही। शहर में दूर से साफ दिखाई देने के बावजूद, अधिकांश स्थानीय निवासी इस इमारत के नाम से या तो अनजान थे या उसे याद करने में कठिनाई महसूस करते थे। 

"पूरे बिहार में वास्तुकला का एक अनूठा नमूना" 
बिहार की राजधानी में स्थित इस "असामान्य इमारत" के वास्तुकार कौन थे, इसे लेकर अब तक कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, हालांकि कुछ का मानना है कि इसे "बिहार के बाहर की किसी कंपनी" ने डिजाइन किया था। इसे ध्वस्त किए जाने के साथ ही इस "कौतूहल भरे ढांचे" को लेकर रहस्य और गहरा गया है। संरक्षण वास्तुकार दिप्तांशु सिन्हा (30) वर्तमान में बर्लिन की एक संस्था में स्नानकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। सिन्हा ने कहा कि इस आधुनिक इमारत को संरक्षित करने के बजाय ढहाए जाने की खबर सुनकर वह "स्तब्ध" हैं। उन्होंने इस इमारत को "संभवतः पूरे बिहार में वास्तुकला का एक अनूठा नमूना" बताया। उन्होंने कहा, "इस इमारत के निर्माण में इस्तेमाल की गई वास्तुशैली को आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन यह 'ब्रूटलिस्ट डिजाइन' की श्रेणी में आती है।" 
 

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