Edited By Khushi, Updated: 22 Feb, 2025 06:46 PM
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रांची: प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि झारखंड में आदिवासी मूलवासी के बीच अपनी पहचान खो चुकी भाजपा राज्य में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
रांची: प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि झारखंड में आदिवासी मूलवासी के बीच अपनी पहचान खो चुकी भाजपा राज्य में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव द्वारा झारखंड प्रभारी के राजू के बयान पर प्रतिक्रिया स्वरूप कांग्रेस के खिलाफ दिए गए बयान पर जवाब देते हुए सोनाल शांति ने कहा कि भाजपा नेता अपने पैरों के नीचे की जमीन देखे आसमान में उड़ने का सपना ना पाले। समीर उरांव के भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष रहते भाजपा ने अपनी जमीन आदिवासी समुदाय के बीच खो दी है।
शांति ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से जल जंगल जमीन की लड़ाई आदिवासियों के हक और अधिकार के लिए संघर्ष करती रही है, जबकि भाजपा की सरकारों ने विभिन्न राज्य में आदिवासियों की जमीन में छीनकर औने-पौने दामों पर उद्योगपतियों को दिया है। झारखंड के आदिवासी मूलवासी की हकमारी में भाजपा अव्वल रही है। अपने राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए आदिवासी समाज को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। आदिवासियों को वनवासियों का नाम देकर उनकी पहचान मिटाने की कोशिश की। शांति ने कहा कि झारखंड के आदिवासी समुदाय ने भाजपा की व्यापारिक नीति को समय रहते भांप लिया और उससे दूर हो गई। जनता ने 2019 के विधानसभा चुनाव में दो और 2024 के में 1 सीट देकर तथा 2024 के लोकसभा की सभी पांच आरक्षित सीटें भाजपा से छीन कर भाजपा नेताओं को संदेश दे दिया है कि आदिवासियों के नाम पर व्यापार करना बंद करें।जनता जागरूक हो चुकी है, अपने अधिकारों के लिए संघर्ष को तैयार है।
शांति ने कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाने वाले बड़बोले समीर उरांव अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव हार चुके हैं। अगर भाजपा आदिवासी की हितैषी है तो समीर उरांव को अपने राष्ट्रीय नेतृत्व से पूछना चाहिए कि राज्यसभा की जिस सीट पर आदिवासी सांसद का कार्यकाल समाप्त हुआ था उस सीट पर गैर आदिवासी को उम्मीदवार क्यों बनाया गया। भाजपा की हकीकत यह है कि इसने आदिवासियों को गले लगाकर उनकी पीठ में छुरा घोंपने का कार्य किया है। शांति ने कहा कि कांग्रेस ने आदिवासी समुदाय को साथ लेकर आजादी का संघर्ष किया था और आजादी के बाद संविधान के माध्यम से अधिकार देने का काम किया। झारखंड के लिए संघर्ष में पिछली लाइन में खड़ी होने वाली भाजपा को झारखंड निर्माण का श्रेय लेने का पाप नहीं करना चाहिए।