CM हेमंत पर निम्न स्तरीय टिप्पणी मरांडी जी की गिरी मानसिकता का परिचय देता है: सोनाल शांति

Edited By Khushi, Updated: 01 Jan, 2026 11:46 AM

marandi s low level comments on cm hemant soren reveal his degraded mentality s

Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निम्न स्तरीय टिप्पणी बाबूलाल मरांडी की गिरी मानसिकता का परिचय देता है। शांति ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन हेमंत सोरेन के खिलाफ...

Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निम्न स्तरीय टिप्पणी बाबूलाल मरांडी की गिरी मानसिकता का परिचय देता है। शांति ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन हेमंत सोरेन के खिलाफ जिस अमर्यादित भाषा का प्रयोग बाबूलाल मरांडी ने किया वह भाजपा की पाठशाला द्वारा दी गई शिक्षा का असर है।

"मरांडी ने पुन: रंग बदला और भाजपा में शामिल हुए"
बाबूलाल मरांडी स्वयं संवैधानिक पद पर है। भाषायी गरिमा को तार-तार करके उन्होंने अशिष्ट भाषा का प्रयोग किया है, अपनी शैली से उन्होंने महागठबंधन के नेताओं का आमंत्रित किया है कि उन्हें इसी भाषा शैली में जवाब मिले। शांति ने कहा कि 'पीठ में छुरा घोंपने' वाली कहावत को झारखंड की राजनीति में बाबूलाल मरांडी ने ही चरितार्थ किया है। जब भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से चलता किया तो उन्होंने चेहरे का दोहरापन दिखाते हुए अलग दल बनाया, जब उनकी करगुजारियों से आजिज आकर उनके नेतृत्व को विधायकों ने उन्हें टाटा बाय-बाय किया तो महागठबंधन को राजनीति का जरिया बनाने की कोशिश की। अपनी विशेषताओं के अनुसार उन्होंने पुन: रंग बदला और भाजपा में शामिल हुए और दोनों प्रमुख पद पर आसीन है जिसे भाजपा के नेता और कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं।

"जेपीएससी की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार साफ दिखाई दिखाई देता था"
शांति ने कहा कि रघुवर दास के 5 वर्षों के शासनकाल में जिस तरह राजशाही तरीके से शासन चलाया गया उसे युवाओं में निराशा फैल गई थी, महिलाएं आर्थिक भविष्य को लेकर चिंतित थी। छात्र आर्थिक अभाव का सामना कर रहे थे, लेकिन महागठबंधन की सशक्त सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सूझबूझ भरे नेतृत्व ने युवाओं, छात्र समुदाय में उत्साह भरा महिला सशक्तिकरण में झारखंड देश के प्रमुख राज्यों में शुमार हुआ। जब- जब झारखंड में नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ हुई तब- तब भाजपा के इशारे पर एक सिंडिकेट ने छात्रों को बरगलाकर नियुक्तियों को बाधित करने का प्रयास किया। डेढ़ दशक से ज्यादा झारखंड में राज करने वाली भाजपा ने जेपीएससी को भ्रष्टाचार का सिंबल और आरएसएस का कार्यालय बना दिया था, जेपीएससी की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार साफ दिखाई दिखाई देता था, लेकिन महागठबंधन सरकार के कार्यकाल में जेपीएससी युवाओं के भविष्य को गढ़ने का काम कर रही है। अभी तक लगभग 70000 नियुक्तियां हुई है मरांडी जी को भी घबराना नहीं चाहिए ऐसी नियुक्तियां उन्हें पूरे 4 साल तक लगातार देखने को मिलेंगे उन्हें दिल को मजबूत रखना चाहिए।

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