Edited By Ramanjot, Updated: 17 Mar, 2026 11:41 AM

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। राज्यसभा जाने की खबरों के साथ ही उनके वेतन और सुविधाओं में बड़े बदलाव की चर्चा तेज है
Nitish Kumar Salary: बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से धुरी बने रहे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अब अपनी भूमिका बदलने की तैयारी में हैं। लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद, अब उनके राज्यसभा जाने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। इस कदम का सीधा अर्थ है- मुख्यमंत्री पद का त्याग और दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश। लेकिन यह बदलाव सिर्फ पद का नहीं, बल्कि वेतन, सुविधाओं और जिम्मेदारियों के बड़े अंतर का भी है।
वेतन और भत्तों का गणित: मुख्यमंत्री बनाम सांसद
नीतीश कुमार जब बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा सांसद की कुर्सी संभालेंगे, तो उनके आर्थिक लाभों में कुछ कटौती देखी जाएगी:
सैलरी: बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हर महीने ₹2 लाख से अधिक का वेतन मिलता रहा है। वहीं, एक सांसद के रूप में उनका मूल वेतन करीब ₹1.25 लाख के आसपास होगा।
दैनिक भत्ता: संसद सत्र के दौरान सांसदों को ₹2,500 प्रति दिन का भत्ता मिलता है।
कार्यालय खर्च: सांसदों को हर महीने करीब ₹75,000 कार्यालय के रखरखाव, स्टाफ (₹50,000) और स्टेशनरी (₹25,000) के लिए दिए जाते हैं।
सुविधाओं में क्या होगा बदलाव?
मुख्यमंत्री के पास राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक नियंत्रण और हाई-प्रोफाइल सुरक्षा घेरा होता है। सांसद बनने पर उनके पास सुविधाएं तो होंगी, लेकिन उनका स्वरूप बदल जाएगा:
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सुविधा
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मुख्यमंत्री पद |
सांसद पद (राज्यसभा) |
| आवास |
पटना में विशाल मुख्यमंत्री आवास |
दिल्ली के लुटियंस जोन में सरकारी बंगला |
| यात्रा |
राजकीय विमान और लग्जरी सुरक्षा काफिला |
साल में 34 मुफ्त हवाई यात्राएं और फर्स्ट क्लास ट्रेन यात्रा |
| मेडिकल |
पूर्ण और असीमित मेडिकल कवरेज |
सीजीएचएस (CGHS) के तहत मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं |
| पावर |
राज्य के नीतिगत फैसलों पर पूर्ण नियंत्रण |
राष्ट्रीय नीतियों और विधायी कार्यों में भागीदारी
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सत्ता का केंद्र: राज्य से राष्ट्र की ओर
भले ही आर्थिक रूप से मुख्यमंत्री का पद अधिक 'पावरफुल' नजर आता हो, लेकिन राज्यसभा सदस्य के रूप में नीतीश कुमार का राजनीतिक कैनवास बड़ा हो जाएगा। दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने का अर्थ है- राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत करना और देश के बड़े नीतिगत फैसलों में सीधी हिस्सेदारी निभाना।