NEET Student Death Case: हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को मिली जमानत, CBI ने 90 दिनों में भी दाखिल नहीं की चार्जशीट

Edited By Ramanjot, Updated: 16 Apr, 2026 04:11 PM

hostel owner granted bail in case of neet student s suspicious death

बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत में मामले के जेल में बंद अभियुक्त मनीष रंजन की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 के तहत एक आवेदन दाखिल कर उसके वकील ने कहा कि उनका...

NEET Student Death Case: बिहार की राजधानी पटना के एक हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जेल में बंद हॉस्टल मलिक को पटना की एक विशेष अदालत ने गुरूवार को जमानत पर मुक्त करने का आदेश दिया। 

90 दिन में चार्जशीट नहीं 

बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत में मामले के जेल में बंद अभियुक्त मनीष रंजन की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 के तहत एक आवेदन दाखिल कर उसके वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल 15 जनवरी 2026 से जेल में बंद है और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है जबकि 90 दिन की निश्चित अवधि बीत चुकी है, इसलिए उनके मुवक्किल को जमानत पर मुक्त किया जाए। आरोप पत्र दाखिल करने के लिए निश्चित 90 दिन की अवधि में आरोप पत्र नहीं दाखिल होने के कारण अदालत ने अभियुक्त को 25 हजार रूपये के निजी मुचलके के साथ इसी राशि के दो जमानदारों का बंध पत्र दाखिल करने पर जमानत पर मुक्त किए जाने का आदेश दिया । 

जांच में देरी पर कोर्ट सख्त 

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त बिना इस अदालत की अनुमति के न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जाएगा, अनुसंधान में सहयोग करेगा, साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा, जब भी अनुसंधान में उसकी आवश्यकता होगी अनुसंधानक को सहयोग करेगा और पटना उच्च न्यायालय में दाखिल की गई याचिका को वापस लेकर एक सप्ताह के अंदर आदेश इस अदालत में दाखिल करेगा। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस अदालत के निर्देश के बावजूद अनुसंधान पूरा कर समय पर आरोप पत्र नहीं दाखिल किया गया। अदालत ने सीबीआई के आरक्षी अधीक्षक को इस बात की प्रशासनिक समीक्षा करने का निर्देश दिया है कि समय पर आरोप पत्र क्यों नहीं दाखिल किया गया। 

गौरतलब है कि 09 जनवरी 2026 को चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने पीड़िता के पिता के बयान पर इस मामले की मूल प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप के अनुसार पीड़िता अपने हॉस्टल में बेहोश पाई गई थी। पीड़िता के पिता ने अपनी पुत्री के शरीर पर चोट के निशान पाये जाने की बात कही थी। साथ ही, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने का प्रयास किये जाने का भी शक जाहिर किया था। बाद में इलाज के दौरान पीड़तिा की मृत्यु अस्पताल में हो गई थी। मृतिका को नाबालिग पाए जाने के बाद मामले का मूल अभिलेख पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत को सौंप दिया गया था । बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की सिफारिश की थी जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई आरसी 07/2026 के रूप में अपनी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। 

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