बिहार का जवान जम्मू-कश्मीर में शहीद, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि; पार्थिव शरीर से लिपटकर रोई पत्नी

Edited By Ramanjot, Updated: 20 Mar, 2026 05:07 PM

soldier from bihar martyred in jammu and kashmir 6 year old son lights funeral

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए समस्तीपुर के लाल सीताराम राय का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके 6 वर्षीय पुत्र सुशांक ने नम आंखों से मुखाग्नि दी, जिसे देख पूरा गांव रो पड़ा।

Bihar News : जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले समस्तीपुर के वीर सपूत सीताराम राय (40) का आज उनके पैतृक गांव लोदीपुर (मोरवा) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहादत के इस गौरवपूर्ण लेकिन गमगीन क्षण में 6 साल के छोटे बेटे सुशांक ने अपने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। पिता को अंतिम विदाई देते समय मासूम बेटे और मौजूद लोगों की आंखों में आंसू थे, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था। 

अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
शुक्रवार सुबह जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में 'वंदे मातरम' और 'शहीद सीताराम अमर रहें' के नारे गूंजने लगे। करीब एक किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में हजारों की भीड़ उमड़ी, जिसमें स्थानीय विधायक रणविजय साहु, जिलाधिकारी (DM) रोशन कुशवाहा और सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 

परिजनों का बुरा हाल: 'अब हमारा क्या होगा?' 
शहीद की पत्नी सुमन राय का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बार-बार बेसुध होकर जिलाधिकारी का हाथ पकड़कर अपने बच्चों के भविष्य की गुहार लगा रही थीं। परिजनों ने बताया कि सीताराम परिवार के एकमात्र स्तंभ थे। उनके पिता ने कोलकाता में ठेला चलाकर उन्हें सेना में भर्ती कराया था। भाई शिवानंद ने रुंधे गले से बताया कि अप्रैल में सीताराम घर आने वाले थे, उन्हें अपने दिव्यांग भतीजे का इलाज कराना था और नया घर भी बनवाना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 

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शहादत से कुछ घंटे पहले हुई थी अंतिम बात 
शहीद के मित्र सर्वेंदु के अनुसार, बुधवार सुबह ड्यूटी पर निकलने से पहले सीताराम ने पत्नी से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसके कुछ ही घंटों बाद सुबह 11 बजे यूनिट से सूचना आई कि मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी है और बाद में उनके शहीद होने की खबर ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। 

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22 साल का शानदार सैन्य करियर 
साल 2002 में भारतीय सेना में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए सीताराम राय अपने 22 साल के करियर में कई महत्वपूर्ण सर्च ऑपरेशनों का हिस्सा रहे। वे मात्र 15 दिन पहले ही एक पारिवारिक समारोह में शामिल होकर ड्यूटी पर लौटे थे।

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