Edited By Khushi, Updated: 15 Apr, 2026 10:32 AM

Jharkhand News: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा है कि वे हर रोज अपना बचा हुआ सम्मान और मर्यादा दोनों खोते जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपने जी तोड़...
Jharkhand News: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा है कि वे हर रोज अपना बचा हुआ सम्मान और मर्यादा दोनों खोते जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपने जी तोड़ मेहनत कर 'मिशन-11' को सार्थक करने के लिए अजीबोगरीब हरकत करने में जुटे हैं।
"चर्चा में बने रहने के लिए मरांडी गवर्नर हाउस का चक्कर लगा रहे"
पांडेय ने कहा कि हाल ही में एक पुलिस अधिकारी द्वारा अमर्यादित भाषा के प्रयोग पर राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पदमुक्त कर दिया। यह प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता को दर्शाता है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस पर भी बाबूलाल मरांडी को दिक्कत है। इससे साफ है कि वे हर मुद्दे पर सिर्फ विरोध करने की राजनीति कर रहे हैं। पांडेय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब तो दिल्ली के भाजपा नेतृत्व भी उनसे दूरी बनाने लगे हैं। चर्चा में बने रहने के लिए बाबूलाल मरांडी रोज गवर्नर हाउस का चक्कर लगा रहे हैं, बेकार के मुद्दे उठाते हैं, चाय पीते हैं और 2003 के अपने प्रिय डोमिसाइल वाले किस्से सुनाकर वहां भी लोगों को परेशान करते हैं। पांडेय ने कहा कि भाजपा के आम कार्यकर्ता भी अब उनसे परेशान हो चुके हैं। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि वे कब पार्टी का पीछा छोड़ेंगे। यहां तक कि कार्यकर्ता मज़ाक में कहते हैं कि उनके हटने पर '100-100 नारियल फोड़े जाएंगे', लेकिन बाबूलाल मरांडी हैं कि मानने को तैयार नहीं हैं।
"बाबूलाल मरांडी ने अब 2029 के लिए ठान लिया है कि वे..."
पांडेय ने आरोप लगाया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा को 24 सीटें मिली थीं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा बाबूलाल मरांडी को चेहरा बनाकर थोपने के बाद 2024 में यह घटकर 21 रह गईं। पिछले पांच वर्षों में वे एक भी उपचुनाव नहीं जिता पाए हैं, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा सीधे प्रधानमंत्री बनने की है। पांडेय ने तंज कसते हुए कहा कि बाबूलाल मरांडी ने अब 2029 के लिए ठान लिया है कि वे भाजपा को 'शगुन के 11 सीट' तक लाकर ही मानेंगे। अगर यही सिलसिला चलता रहा तो अगली बार 5 सीटें भी मुश्किल हो जाएंगी। पांडेय ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को रोज गवर्नर हाउस में चाय पीने, पुराने डोमिसाइल के किस्से दोहराने और छोटे अधिकारियों को 'मैं एक्सपोज़ कर दूंगा' जैसी धमकियां देने से फुर्सत नहीं है, ऐसे में वे पार्टी और जनता के असली मुद्दों पर क्या ध्यान देंगे। पांडेय ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को सबसे पहले अपना एजेंडा एक्सपोज करना चाहिए और जनता को बताना चाहिए कि वे आखिर चाहते क्या हैं।