नीतीश के राज्यसभा जाने पर भड़के JDU कार्यकर्ता, CM आवास के बाहर भारी बवाल; दिग्गजों की एंट्री बंद!

Edited By Ramanjot, Updated: 05 Mar, 2026 01:11 PM

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस फैसले के विरोध में जेडीयू कार्यकर्ता दो गुटों में बंट गए हैं। समर्थकों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर वरिष्ठ नेताओं का प्रवेश रोक दिया है।

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल पैदा हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के राज्यसभा जाने की खबरों ने तूल पकड़ा। 'सुशासन बाबू' के दिल्ली कूच की चर्चा मात्र से जनता दल यूनाइटेड (JDU) दो फाड़ होती नजर आ रही है। एक ओर जहां नीतीश कुमार आज राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर उनके वफादार कार्यकर्ता और विधायक इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। 

CM आवास के बाहर भारी हंगामा, दिग्गजों की एंट्री बंद 

सुबह से ही बड़ी संख्या में जेडीयू कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर एकत्रित हो गए हैं। आक्रोशित समर्थकों ने नीतीश कुमार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए नारेबाज़ी की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को मुख्यमंत्री आवास के भीतर जाने से रोक दिया। समर्थकों का साफ कहना है कि वे अपने नेता को बिहार की कमान छोड़कर दिल्ली नहीं जाने देंगे। 
 

 

 

"हमने लाठियां खाई हैं, हम रोएं नहीं तो क्या करें?" 

पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के सुर अब सार्वजनिक हो चुके हैं। जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने भावुक होते हुए कहा, "हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए लाठियां और लात-घूंसे सहे हैं। 2025 के चुनाव में हमने घर-घर जाकर उनके नाम पर वोट मांगे थे। अगर वो ही मुख्यमंत्री नहीं रहे, तो बिहार की जनता कहां जाएगी? अगर किसी को मुख्यमंत्री बदलना है, तो फिर से चुनाव करा ले। हम उन्हें नामांकन दाखिल करने नहीं जाने देंगे।" 
 

 

सरयू राय ने फैसले पर उठाए सवाल 

नीतीश कुमार के पुराने मित्र और विधायक सरयू राय ने भी इस फैसले को 'गलत समय' पर लिया गया निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि सत्ता हस्तांतरण का यह तरीका लोकतांत्रिक और व्यावहारिक नहीं लग रहा है। सरयू राय के अनुसार, चुनाव के तुरंत बाद अचानक ऐसा फैसला लेना जनता और समर्थकों के साथ अन्याय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतने बड़े फैसले से पहले पार्टी के भीतर व्यापक विमर्श (Consultation) होना चाहिए था। राय ने स्पष्ट किया कि बिहार को अभी कुछ और समय तक नीतीश कुमार के नेतृत्व की आवश्यकता है।

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