इस राज्य में उद्योग लगाना हुआ आसान: 30 दिनों में मिलेगी मंजूरी, नहीं तो माना जाएगा 'डीम्ड क्लीयरेंस'

Edited By Ramanjot, Updated: 09 Jun, 2026 06:31 PM

setting up industries in bihar has become easier approval will be granted withi

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य बिहार में औद्योगिक विकास को तेज करना, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना और राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाना है।

Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को घोषणा की कि औद्योगिक एवं निवेश संबंधी सभी आवश्यक मंजूरियां अब 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि संबंधित विभाग या प्राधिकरण तय समय-सीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लेता है, तो आवेदन को स्वतः स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी। 

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य बिहार में औद्योगिक विकास को तेज करना, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना और राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाना है। सम्राट ने कहा कि बिहार में उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि सरकार उद्योगों की स्थापना से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उद्योग स्थापना से संबंधित प्रशासनिक जटिलताओं और अनावश्यक देरी को समाप्त कर निवेशकों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है। 

बयान में बताया गया कि बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2016 के तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) सचिवालय को 'एकल नोडल एजेंसी' का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही उसे व्यापक प्रशासनिक और कानूनी अधिकार भी प्रदान किए गए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, किसी निवेश प्रस्ताव की तकनीकी जांच और अनुशंसा पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकारी को 30 दिनों के भीतर या निर्धारित समय-सीमा में मंजूरी देनी होगी। यह प्रावधान केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई विभाग या सक्षम प्राधिकारी तय अवधि के भीतर निर्णय लेने में असफल रहता है, तो निवेशकों के हितों की रक्षा करते हुए एसआईपीबी सचिवालय 'डीम्ड क्लीयरेंस' (मंजूरी) जारी करेगा। ऐसी स्वीकृति सभी संबंधित विभागों पर बाध्यकारी होगी और उसके पुनर्विचार की कोई व्यवस्था नहीं होगी। सम्राट ने विश्वास जताया कि यह पहल बिहार को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने की दिशा में उसकी प्रगति को और मजबूती प्रदान करेगी। 

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