"मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी, जिसे केंद्र सरकार ने तोड़ दिया", केशव महतो कमलेश का निशाना

Edited By Khushi, Updated: 04 Jan, 2026 02:46 PM

mnrega was the backbone of the rural economy which the central government has

Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी 5 जनवरी को मनरेगा कानून और नाम में बदलाव के विरोध में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत यहां बापू वाटिका मोरहाबादी से लोक भवन रांची तक पैदल मार्च करेगी।

Ranchi News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी 5 जनवरी को मनरेगा कानून और नाम में बदलाव के विरोध में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत यहां बापू वाटिका मोरहाबादी से लोक भवन रांची तक पैदल मार्च करेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय स्तर पर ‘मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान चलाया जाएगा। कमलेश ने बताया कि इस आंदोलन को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। प्रथम चरण के तहत 8 जनवरी को राज्य स्तर पर कांग्रेस नेताओं की राज्य प्रभारी के साथ तैयारी बैठक होगी। इसके बाद 10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। वहीं 11 जनवरी को गांधी प्रतिमा या अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास एवं धरना दिया जाएगा।

"मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीढ़ था जिसे केंद्र सरकार ने तोड़ दिया"
कमलेश ने बताया कि द्वितीय चरण में 12 जनवरी से 30 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान सभी ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों एवं मनरेगा कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष का पत्र वितरित किया जाएगा। इसके साथ ही विधानसभा स्तरीय नुक्कड़ सभाएं और पंपलेट वितरण कार्यक्रम होंगे। 30 जनवरी शहीद दिवस के अवसर पर मनरेगा कार्यकर्ताओं एवं आंदोलनकारियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। तृतीय चरण के तहत 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय ‘मनरेगा बचाओ' धरना आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा या लोक भवन घेराव किया जाएगा। वहीं 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच देश के विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्रीय स्तर पर चार ‘मनरेगा बचाओ' रैलियों का आयोजन किया जाएगा। कमलेश ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना ग्रामीण भारत पर हमला है, मनरेगा के तहत योजनाओं का चयन पहले गांव में होता था अब केंद्र योजना पंचायत और गांव का चुनाव करेगा। वर्तमान भी भीबी- जीरामजी योजना से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा जो देश के लिए हितकर नहीं होगा। मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीढ़ था जिसे केंद्र सरकार ने तोड़ दिया, कोरोना काल में मनरेगा ने गांव में संजीवनी का काम किया था जो आपात स्थिति में किसी योजना के महत्व को दर्शाता है, नरेंद्र मोदी इसे मिटाना चाहते हैं।

"बीजेपी नहीं चाहती कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले"
कमलेश ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 10 वर्षों पूर्व मनरेगा की आलोचना करते हुए मनरेगा को यूपीए सरकार का स्मारक कहा था, मनरेगा में हर पंचायत को राशि मिलता था, लेकिन अब सिर्फ चुनिंदा पंचायतों को राशि मिलेगी इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटेंगे। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि भाजपा की विचारधारा गांधी जी के विपरीत है यही वजह है कि महात्मा गांधी के नाम को हटाकर नई योजना लाई गई। बीजेपी नहीं चाहती कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले, आर्थिक संपन्नता हो, क्रय शक्ति बढ़े इससे भाजपा की पूंजीवादी सोच झलकती है। नाम में बदलाव भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है, हिंदू धर्म को योजना में भावनात्मक रूप से जोड़कर राजनीतिक मंसूबा साधने की कोशिश की गई है। सरकार 125 दिन रोजगार देने की बात करती है, लेकिन सभी निबंधित मजदूरों को रोजगार दिया गया तो बड़ी राशि की आवश्यकता पड़ेगी जिसका प्रावधान बजट में नहीं, सरकार मजदूरों के साथ छलावा कर रही है। 

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