मातृभाषा संस्कृति, संस्कार और संवेदना को अभिव्यक्त करने का सच्चा माध्यम: द्रौपदी मुर्मू

Edited By Diksha kanojia, Updated: 22 Feb, 2021 12:36 PM

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मुर्मू ने रविवार को अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय लुप्तप्राय देशज भाषा और संस्कृति प्रलेखन केंद्र के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा स्वयं की संस्कृति, संस्कार और संवेदना को...

 

रांचीः झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने मातृभाषा को संस्कृति, संस्कार और संवेदना को अभिव्यक्त करने का सच्चा माध्यम बताया है। मुर्मू ने रविवार को अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय लुप्तप्राय देशज भाषा और संस्कृति प्रलेखन केंद्र के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा स्वयं की संस्कृति, संस्कार और संवेदना को अभिव्यक्त करने का सच्चा माध्यम है।

मातृभाषा वात्सल्यमयी मां के समान होती है। मातृभाषा का सम्मान माता का सम्मान है। मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक, संस्कृति एवं भाषायी पहचान होती है। राज्यपाल ने कहा कि माता के गर्भ में ही किसी बच्चे में भाषा का सम्प्रेषण आरंभ हो जाता है। अभिमन्यू ने गर्भ में ही चक्रव्यूह को भेदने की कला सीखी थी।

जन्म लेने के बाद मानव जो प्रथम भाषा सीखता है, जो उसके समाज में बोली जाती है, वह उसकी मातृभाषा होती है। मातृभाषा बच्चे के लिए संस्कृति, संस्कार और संवेदना को अभिव्यक्त करने का सच्चा माध्यम है। ऐसे में मातृ भाषा में पढ़ाई को बढ़ावा देना सराहनीय है।
 

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