बिहार में 10 नवंबर को किसका होगा राजतिलक, एक बार फिर से नीतीशे कुमार या बनेगी तेजस्वी की सरकार

Edited By Ajay kumar, Updated: 09 Nov, 2020 07:05 PM

bihar nitishe kumar or tejashwi s government will be formed once again

बिहार की राजनीति में 10 नवंबर का दिन एक नई करवट लेने जा रही है। 15 साल से बिहार की राजनीति के सुपर मैन बन कर उभरे नीतीश कुमार अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन लड़ाई में फंस गए हैं।

बिहार डेस्क: बिहार की राजनीति में 10 नवंबर का दिन एक नई करवट लेने जा रही है। 15 साल से बिहार की राजनीति के सुपर मैन बन कर उभरे नीतीश कुमार अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन लड़ाई में फंस गए हैं। लालू यादव के लाल तेजस्वी यादव ने दस लाख रोजगार के वादे से नीतीश कुमार की सियासी जमीन पर करारा प्रहार कर दिया है। ज्यादातर चुनावी एग्जिट पोल तेजस्वी की जीत की तरफ इशारा कर रहे हैं। लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए के दिग्गजों ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी है। आरजेडी की चुनावी रणनीति तैयार करने वाले नेताओं को इस बात का यकीन है कि तेजस्वी यादव के ही नेतृत्व में अगली सरकार बनेगी। आरजेडी के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि ओपिनियन पोल से लेकर एग्जिट पोल तक पार्टी ने लंबा रास्ता तय कर लिया है। झा ने कहा कि बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव में भरोसा जताया है। झा ने कहा कि आरजेडी को अपनी जीत का पूरा भरोसा है। 

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महागठबंधन को बंपर बहुमत मिलने का संकेत

ज्यादातर चुनावी सर्वे महागठबंधन को बंपर बहुमत मिलने का संकेत दे रही हैं। इससे महागठबंधन खेमे में उत्साह की लहर है। तेजस्वी यादव की ताजपोशी की उम्मीदों से महागठबंधन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह सातवें आसमान पर है। कार्यकर्ताओं के उत्साह को देख कर तेजस्वी यादव ने पहले ही संयम बरतने की नसीहत जारी कर दी है। तो कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुट गए हैं। रणदीप सुरजेवाला ने कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेताओं से मुलाकात कर चुनावी नतीजों को लेकर चर्चा की है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी भी बिहार के एग्जिट पोल को लेकर उत्साहित है। कांग्रेस आलाकमान ने एग्जिट पोल के नतीजों के तुरंत बाद सक्रियता दिखाते हुए पार्टी के दो दिग्गजों को पटना भेज दिया। सोनिया गांधी ने कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और अविनाश पांडे को बिहार का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। 

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साइलेंट वोटर पर टिकीं NDA खेमा की नजर
वहीं तमाम एग्जिट पोल के उलटे अनुमान के बावजूद एनडीए खेमा अभी भी साइलेंट वोटर को लेकर उम्मीदें बांधे हुए है। एनडीए खेमा महिला वोटरों को लेकर भी थोड़ा ज्यादा उत्साहित है। विधानसभा और लोकसभा के पिछले तीन चुनावों में राज्य में महिला वोटरों का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था और इसका सीधा फायदा नीतीश कुमार को मिला था। एनडीए को उम्मीद है कि महिलाओं ने एक बार फिर बंपर वोटिंग की है जिसका फायदा उन्हें ही मिलेगा। एग्जिट पोल के अनुमान भले ही एनडीए के पक्ष में जाता नहीं दिख रहा हो लेकिन एनडीए खेमे में साइलेंट वोटरों को लेकर एक उम्मीद की किरण दिख रही है। बीजेपी और जेडीयू दोनों के नेताओं का मानना था कि साइलेंट वोटर बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम में करिश्मा कर सकता है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी  की योजनाओं से सीधा लाभ गरीब लोगों को हुआ है और ये साइलेंट वोटर है। जायसवाल ने कहा कि अंतिम परिणाम के बाद एनडीए सरकार बना लेगी। 

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NDA की उम्मीद कायम, क्योंकि कई बार गलत साबित हुए हैं एग्जिट पोल
एनडीए की उम्मीद इसलिए भी कायम है क्योंकि तीन मौकों पर बिहार में एग्जिट पोल गलत साबित हुए हैं। 2005, 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में बिहार के एग्जिट पोल सही साबित नहीं हुए थे। 2005 में नीतीश कुमार की सत्ता में वापसी का किसी ने अनुमान नहीं लगाया था तो 2010 के विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल की भविष्यवाणी भी सही नहीं रही थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स में बीजेपी के गठबंधन की सरकार बनाने की उम्मीद जताई गई लेकिन महागठबंधन को बंपर बहुमत मिला था। यही वजह है कि एनडीए के नेताओं की उम्मीद और जोश बरकरार है। 

JDU के नेताओं को महिलाओं और ईबीसी वोटरों को लेकर काफी उम्मीद 
जेडीयू के नेताओं को महिलाओं और ईबीसी वोटरों को लेकर काफी उम्मीद है। जेडीयू के स्टेट यूनिट के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि 2005 में किसी ने नहीं कहा था कि नीतीश कुमार वापसी करने वाले हैं। चौधरी ने कहा कि 2010 में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई थी तो 2015 में एग्जिट पोल बीजेपी की सरकार बना रहे थे। चौधरी ने कहा कि ये तमाम दावे बुरी तरह फेल हो गए थे। चौधरी ने कहा कि 2020 के चुनाव को लेकर जारी हुए एग्जिट पोल को लेकर इसलिए उन्हें भरोसा नहीं है। 

खैर जब तक अंतिम नतीजे नहीं आ जाते तब तक हर पार्टी के नेता खुद की जीत का दावा करते ही रहेंगे लेकिन अब तो बस एक कयामत की रात की बात है। 10 नवंबर को आने वाले नतीजों से ये साफ हो जाएगा कि बिहार की जनता ने किसके माथे पर ताज रखा है। 

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