CM नीतीश ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 2 साल में 87,689 करोड़ रुपए का किया इंतजाम, देश में रोल मॉडल बना बिहार

Edited By Swati Sharma, Updated: 03 Apr, 2025 05:58 PM

cm nitish arranged so many crores in 2 years for women empowerment

पटना (विकास कुमार):  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने 2005 से लेकर 2025 तक महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। केवल दो वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 87,689 करोड़ रुपए का इंतजाम किया है। एक तरह से बजटीय आवंटन के...

पटना (विकास कुमार):  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने 2005 से लेकर 2025 तक महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। केवल दो वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 87,689 करोड़ रुपए का इंतजाम किया है। एक तरह से बजटीय आवंटन के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नीतीश सरकार ने अनगिनत कदम उठाए हैं। बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में महिलाओं के कल्याण पर पिछले साल की तुलना में 24.65 राशि अधिक खर्च की जाएगी। महिलाओं के लिए बजट में निर्धारित राशि को जेंडर बजट से प्रदर्शित किया जाता है। जेंडर बजट का उपयोग महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जेंडर बजट पर 39,033 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया, तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में जेंडर बजट पर 48,656 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नीतीश बाबू ने लिए बड़े फैसले:-
 

नीतीश सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं-
* पटना में महिला हाट की स्थापना की जाएगी और अन्य सभी बड़े शहरों में स्थापित व्यापार स्थल में महिलाओं के लिए स्थल मुहैया कराई जाएगी।
* बिहार राज्य पथ परिवहन निगम में महिलाओं को नौकरियों में 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा।
* महिलाओं के लिए ‘पिंक टॉयलेट’ का निर्माण होगा।
* कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए नए हॉस्टल बनाए जाएंगे।
* हर पंचायत में विवाह मंडप बनाया जाएगा, जहां गरीब बेटियों की शादी कराई जाएगी।
*  बिहार के प्रमुख शहरों में महिलाओं के लिए पिंक बस का परिचालन किया जाएगा। इसमें सवारी,चालक और कंडक्टर सभी महिलाएं होंगी। चालक और कंडक्टर के रूप में महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम से चालक,कंडक्टर और डिपो मेंटेनेंस स्टाफ के पदों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाएगी।
 * अब राज्य के प्रमुख शहरों में महिलाओं के लिए विशेष ड्राइविंग सेंटर खोले जाएंगे, जहां ट्रेनर भी महिलाएं ही होंगी। इसके साथ महिलाओं को ई-रिक्शा और दो पहिया वाहन खरीदने के लिए अनुदान भी मिलेगा, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का एक और अवसर मिलेगा।
* पर्व-त्योहार विशेषकर महिलाओं द्वारा संचालित छठ पूजा के अवसर पर धार्मिक पर्यटन योजना की शुरुआत की जाएगी।इसमें होम स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद प्रदान किया जाएगा।
* प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं को पर्यटन गाइड के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।
* महिला सिपाहियों को पदस्थापन थाने के आस-पास आवासन सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा किराए पर आवास लेकर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
* जीविका द्वारा सामुदायिक पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु 29 प्रशिक्षण एवं शिक्षण केंद्रों का संचालन स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इन प्रशिक्षण एवं शिक्षण केंद्रों से 705 संकुल स्तरीय संघ सम्बद्ध हैं,जिसमें आवासीय एवं गैर- आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करने की सुविधा उपलब्ध  है।
* जीविका द्वारा अब तक कुल 10.63 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है,जिसके अंतर्गत 131 लाख से अधिक पारिवारिक समूहों से जोड़ा गया है। इन स्वयं सहायता समूह को 477.94 करोड़ रुपए का कर्ज प्रदान किया गया है।
*बिहार के अलग-अलग पंचायतों में 5,986 बैंक सखी (बैंकर दीदी) सदस्यों के माध्यम से 14,961 करोड़ रुपए का जमा निकासी किया गया है। राज्य में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 78.40 लाख से अधिक सदस्यों को बीमा की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
* बिहार में जीविका परियोजना द्वारा हर जिले में सरस मेले का आयोजन किया जाएगा।
* पंचायत स्तर पर जीविका भवन मुहैया कराया जाएगा। इसका उपयोग महिलाओं से जुड़े तमाम मुद्दों पर संवाद किया जाएगा।
* कृषि क्षेत्र में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कृषि विभाग के साथ समन्वय कर निरंतर कार्य किया जा रहा है।अब तक 35.89 लाख महिलाओं द्वारा खेती किसानी को नई तकनीक अपनाया गया है। बिहार में महिलाओं द्वारा संचालित 70 किसान उत्पादक कंपनियों के पंजीकरण के साथ महिला किसानों का उत्प्रेरण,उत्पादों का एकत्रीकरण और बाजार से उनका जुड़ाव किया जा रहा है।
* बिहार सरकार ने राज्य में कुल 22 मातृ एवं शिशु अस्पताल का निर्माण कराया जाएगा। पटना,भागलपुर, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,समस्तीपुर और गया आदि जिलों में इन अस्पतालों के निर्माण से महिलाओं और शिशुओं को बेहतर इलाज मिलेगा।
* पिछले वित्तीय वर्ष में UPSC  की पीटी परीक्षा पास करने वाली बिहार की 102 महिला अभ्यर्थियों और BPSC की पीटी परीक्षा पास करने वाली 1615 महिला अभ्यर्थियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया गया है।
* मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत साल 2024-25 में अब तक 57,011 लाभुकों को लाभान्वित किया गया है।
* मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत साल 2024-25 में 3,12,390 कन्याओं को लाभान्वित किया गया है।
* सात निश्चय एक योजना के तहत 5 महिला आईटीआई का निर्माण किया जा चुका है।
* सात निश्चय दो योजना के तहत 2 महिला आईटीआई का निर्माण किया जा चुका है।
 

‘जीविका दीदी से पर्यावरण का भी हो रहा संरक्षण’
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदी योजना चलाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जीविका दीदी स्वावलंबी होकर अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। जीविका दीदियां अब पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। दीदी की नर्सरी के पौधे से बिहार की धरती पर हरियाली आ रही है, वहीं दीदियों के घरों में भी समृद्धि के द्वार खुल रहे हैं। स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से हरियाली को भी बढ़ावा मिल रही है।
 
जीविका दीदियों के द्वारा जो नर्सरी चलाई जा रही हैं, उनसे वन विभाग एवं मनरेगा के द्वारा पौधे की खरीदारी किए जाने का प्रावधान है। जीविका दीदी को नीतीश सरकार हर संभव मदद कर रही है। विभिन्न योजनाओं के तहत सरकार द्वारा जीविका दीदियों के पौधों को खरीदा जाएगा। इस तरह उन्हें स्वरोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा। पोषण, सुरक्षा और पर्यावरण सुरक्षा भी पूरा किया जा सकेगा। पहले बिहार में पौधारोपण के लिए दूसरे राज्यों से पौधा मंगाने से उसकी खरीद महंगी होती है और दूर से आने पर रास्ते में पौधा सूख जाता था। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से सस्ता और गुणवत्ता पूर्ण होगा, जिससे हरित आवरण का लक्ष्य को ससमय पूरा किया जा सकेगा। जीविका दीदी की नर्सरी से स्वरोजगार के अवसर तो मिल ही रहे हैं। इसके अलावा हरियाली आच्छादन कार्यक्रम को भी इससे सफलता मिलेगी। अब दूसरे राज्यों से पौधे की खरीदारी के लिए निर्भरता समाप्त हो जाएगी। जीविका दीदियों के द्वारा नर्सरी में फूल का पौधा लगाने का कार्य कर रही हैं, इससे स्वावलंबी होने के साथ ही बिहार में विकास की इबारत लिख रही हैं।

साल 2005 में जब नीतीश बाबू ने मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला था तब बिहार जीवन के हर मोर्चे पर बहुत ही पिछड़ा हुआ था। खासकर महिलाओं की स्थिति समाज में बहुत ही निचले स्तर पर थी। लड़कियों को पहले पढ़ाई के लिए प्रेरित नहीं किया जाता था। कम उम्र में ही लड़कियों का विवाह करवा दिया जाता था। इसलिए सत्ता संभालने के बाद नीतीश बाबू ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भागीरथ प्रयास किया। अब इसका परिणाम आपको बिहार के हर शहर,हर कस्बे और हर गांव में लड़कियां सरकार द्वारा दिए साइकिल पर सवार होकर पढ़ने के लिए जाती हैं। इस दृश्य की कल्पना 2005 में किसी ने भी नहीं की थी। आज अगर बिहार की लड़कियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिल रहा है तो यह भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की देन है,इसलिए जब भी बिहार में महिलाओं के सशक्तिकरण का इतिहास लिखा जाएगा तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

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