खुले आकाश तले विराजमान शिवलिंग: आस्था और चमत्कार का प्रतीक है रामगढ़ का बूढ़ाछत्तर धाम

Edited By Khushi, Updated: 12 Feb, 2026 05:09 PM

a shivalinga sits under the open sky ramgarh s budha chhattar dham is a symbol

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित रायपुरा गांव का बूढ़ाछत्तर धाम पूरे क्षेत्र में पौराणिक आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थापित विशाल और गोलाकार शिवलिंग श्रद्धालुओं की गहरी...

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित रायपुरा गांव का बूढ़ाछत्तर धाम पूरे क्षेत्र में पौराणिक आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थापित विशाल और गोलाकार शिवलिंग श्रद्धालुओं की गहरी श्रद्धा का आधार है। प्रतिदिन भक्तजन भोलेनाथ को जलार्पण करने पहुंचते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। चारों ओर ‘हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठता है।

बूढ़ाछत्तर धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव खुले आकाश के नीचे विराजमान हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, कभी श्रद्धालुओं ने यहां मंदिर निर्माण का प्रयास किया था, किंतु भगवान शिव ने मंदिर में वास स्वीकार नहीं किया और निर्मित संरचना ध्वस्त हो गई। तब से शिवलिंग खुले आसमान के नीचे ही स्थापित है, जो इस धाम को विशिष्ट और रहस्यमयी बनाता है। ग्रामीणों के बीच प्रचलित किवदंती के अनुसार, रामगढ़ राजा कामाख्या नारायण सिंह के पूर्वज जगन्नाथपुरी की यात्रा के दौरान इस मार्ग से गुजरते थे और बूढ़ाछत्तर में विश्राम करते थे। कहा जाता है कि एक बार रामगढ़ राजा और कलिंग महाराज नील माधव ने यहां शिव आराधना के बाद शिवलिंग को अपने साथ ले जाने का प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग रास्ते में लुढ़ककर पुन: बूढ़ाछत्तर लौट आई। अनेक प्रयासों के बावजूद शिवलिंग को हटाया नहीं जा सका।

इसी क्रम में शिवलिंग आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें से दूध की धारा प्रवाहित होने लगी। तभी से इसे स्वयंभू और चमत्कारी शिवलिंग माना जाता है। धाम से जुड़ी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। गांव में किसी गाय के बछड़े के जन्म पर पहला दूध बूढ़ाछत्तर धाम में अर्पित किया जाता है। परिसर में काली स्वरूप में विराजमान देवी पार्वती को बकरे अथवा नारियल की बलि देने की परंपरा भी प्रचलित है। इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर धाम में भव्य आयोजन होगा। श्रद्धालु निर्जला उपवास रखकर पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भक्ति अनुष्ठान करेंगे। रात्रि में जागरण और पारंपरिक छऊ नृत्य का आयोजन मुख्य आकर्षण रहेगा। मान्यता है कि महाशिवरात्रि महोत्सव के साथ ही क्षेत्र में मंडा पर्व की शुरुआत होती है, जिससे बूढ़ाछत्तर धाम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

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