Edited By Khushi, Updated: 21 Feb, 2026 02:40 PM

Jharkhand News: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह शुक्रवार को झारखंड नगर निकाय चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के प्रचार के लिए जमशेदपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो हर चुनाव को गंभीरता से लेती है।
Jharkhand News: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह शुक्रवार को झारखंड नगर निकाय चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के प्रचार के लिए जमशेदपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो हर चुनाव को गंभीरता से लेती है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस एक “सीजनल पार्टी” है, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है और नगर निकाय से लेकर लोकसभा चुनाव तक हर चुनाव को समान महत्व देती है।
झारखंड सरकार पर निशाना
केंद्रीय मंत्री ने हेमंत सोरेन सरकार पर आरोप लगाया कि वह सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा रही है और वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि झारखंड में आदिवासियों की संख्या घट रही है, जबकि घुसपैठियों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे बंगाल को “बांग्लादेश” में बदलने की कोशिश कर रही हैं और झारखंड सरकार उसी राह पर चल रही है।
केंद्र सरकार की उपलब्धियां
गिरिराज सिंह ने झारखंड के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच राज्य को केवल सवा लाख करोड़ रुपये मिले, जबकि मोदी सरकार ने लगभग चार लाख करोड़ रुपये दिए। उन्होंने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में 67 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य और ट्रैक दोहरीकरण जैसे विकास कार्यों का भी जिक्र किया।
अल्पसंख्यक और नागरिकता पर टिप्पणी
केंद्रीय मंत्री ने “अल्पसंख्यक” की परिभाषा पर बहस छेड़ते हुए कहा कि अब इसे सड़क से संसद तक चर्चा का विषय बनाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीनगर, मल्लपुरम (केरल) और किशनगंज (बिहार) में मुस्लिम आबादी अधिक होने के बावजूद उन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है, जिसे दोबारा सोचना चाहिए।
राष्ट्रवाद और नागरिकता
गिरिराज सिंह ने कहा कि जो लोग देश से प्यार करते हैं, वे विदेशी घुसपैठियों का समर्थन नहीं कर सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि देश का नागरिक कौन होगा और विदेशियों को वोट देने का अधिकार किसने दिया?