चारा घोटाला मामलाः अभी भी जेल में ही रहेंगे लालू यादव, जमानत अर्जी पर सुनवाई टली

Edited By Nitika, Updated: 27 Nov, 2020 01:25 PM

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साढ़े 900 करोड़ के चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव आज भी जेल से बाहर नहीं आ पाए हैं। चारा घोटाले के 4 मामलों में से एक में लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई 11 दिसंबर तक टल गई है।

 

रांचीः साढ़े 900 करोड़ के चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव आज भी जेल से बाहर नहीं आ पाए हैं। चारा घोटाले के 4 मामलों में से एक में लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई 11 दिसंबर तक टल गई है। इस मामले में लालू को 14 वर्ष तक की कैद की सजा सुनाई गई थी। वहीं इस समय लालू यादव का रांची स्थित रिम्स में इलाज चल रहा है।

लालू प्रसाद की ओर से उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील रखी। इससे पूर्व इस मामले में 24 नवंबर को दाखिल अपने जवाब में सीबीआई ने दावा किया था कि वास्तव में लालू प्रसाद ने दुमका कोषागार से गबन के मामले में अब तक एक दिन की भी सजा नहीं काटी है लिहाजा उन्हें इस मामले में अभी जमानत देने का कोई भी पुख्ता आधार नहीं बनता है जबकि लालू के वकीलों ने दावा किया है कि लालू ने इस मामले में अपनी आधी सजा न्यायिक हिरासत में पूरी कर ली है।

सीबीआई ने शुक्रवार को अपने जवाब में यह भी कहा कि लालू ने स्वयं सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष अपनी सजाओं को एक साथ चलाने का कोई अनुरोध नहीं किया था। दुमका मामले में 6 नवंबर को सुनवाई प्रारंभ होते ही सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में लालू के आधी से अधिक सजा पूरी कर लेने के दावे एवं अन्य दावों के बारे में वह लिखित रूप से अपना पक्ष रखेगी, जिसके लिए उसे समय दिया जाए। हालांकि सीबीआई के इस कथन पर लालू के वकील सिब्बल ने दिल्ली से डिजिटल तरीके से उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि सीबीआई जान-बूझकर अनावश्यक रूप से लालू की जमानत के इस मामले में विलंब कर रही है।

सिब्बल ने दावा किया था कि लालू ने दुमका कोषागार से जुड़े चारा घोटाले के इस मामले में 6 नवंबर को हुई सुनवाई के दिन तक कुल 42 माह, 26 दिनों की सजा काट ली थी जो लालू को दी गई। 7 वर्ष की सजा आधे समय से अधिक है। सिब्बल ने कहा कि ऐसे में उच्च न्यायालय को उन्हें जमानत देनी चाहिए। सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद झारखंड उच्च न्यायालय ने लालू की जमातन की याचिका पर सुनवाई 27 नवंबर तक के लिए टाल दी थी।

बता दें कि चारा घोटाले के दुमका मामले में लालू को विशेष सीबीआई अदालत ने 14 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनायी थी। उन्हें 4 मामलों में से 3 में पहले ही जमानत मिल चुकी है। सीबीआई ने अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 427 का उल्लेख करते हुए अपने जवाब में कहा है कि लालू को अब तक चारा घोटाले के 4 विभिन्न मामलों में सीबीआई अदालतों ने सजा सुनाई है और दुमका मामले में उन्हें 14 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि लालू को दुमका मामले में मिली सजा उन्हें चारा घोटाले के अन्य मामलों में मिली सजा के साथ ही चलेगी और अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 427 के तहत सजा देने वाली अदालत के ऐसा उल्लेख न करने पर अभियुक्त की सजाएं एक के बाद एक क्रमवार चलती हैं।

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