"धमाके की आवाज से खिड़कियां हिल गईं, सायरन का शोर कानों में गूंज रहा", भयानक जंग में फंसे जमशेदपुर के युवाओं ने बताई आपबीती

Edited By Khushi, Updated: 02 Mar, 2026 01:25 PM

the sound of the explosion shook the windows and everything felt terrifying

Jharkhand News: खाड़ी देशों में इन दिनों ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वहां रहने वाले भारतीय युवाओं की जिंदगी मुश्किल बना दी है। जमशेदपुर के आजादनगर, मानगो, जाकिरनगर और चेपापुल के कई युवा नौकरी के लिए विदेश गए थे, लेकिन अब वे खतरनाक हालात में...

Jharkhand News: खाड़ी देशों में इन दिनों ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वहां रहने वाले भारतीय युवाओं की जिंदगी मुश्किल बना दी है। जमशेदपुर के आजादनगर, मानगो, जाकिरनगर और चेपापुल के कई युवा नौकरी के लिए विदेश गए थे, लेकिन अब वे खतरनाक हालात में फंसे हुए हैं।

युद्ध की खबरें टीवी और मोबाइल की स्क्रीन पर दिखती हैं, लेकिन वहां फंसे युवाओं के लिए हर दिन डर और अनिश्चितता लेकर आता है। सुरक्षा कारणों से स्थानीय सरकारों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करने पर रोक लगा दी है, जिससे युवा अपने परिवारों को हालात बताने से भी डर रहे हैं।

जमशेदपुर के युवाओं की जुबानी

  • इंजमाम अहमद (दुबई) – जाकिरनगर: "फ्लैट के पास बम का टुकड़ा गिरा।"
    इंजमाम कहते हैं कि धमाके की आवाज से खिड़कियां हिल गईं और सब कुछ डरावना लगने लगा। अब बस अपनों के पास लौटने की तड़प है।

 

  • अदनान (कुवैत) – आजादनगर: "कंपनी के पास मिसाइल गिरी।"
    अदनान बताते हैं कि हर सायरन की आवाज उनके कानों में आज भी गूंजती है। वतन की मिट्टी की याद उन्हें हर पल सताती है।

 

  • अरसलान (कतर) – स्टील प्लांट के पास: "धमाकों के बाद कमरों में कैद हैं।"
    अरसलान कहते हैं कि कंपनी के बाहर सुरक्षा इतनी सख्त हो गई है कि काम के अलावा हम बाहर नहीं निकल सकते। घर ही सबसे सुरक्षित जगह लगती है।

 

  • मुस्तफा अहमद (आबू धाबी) – अफवाहों के बीच बेबसी:
    मुस्तफा बताते हैं कि आबू धाबी की सड़कें सुनसान हैं और फ्लाइट्स बंद होने की वजह से घर लौटने का रास्ता मुश्किल है।

 

  • इमरान खान (दुबई/बहरीन) – सैन्य कैंप के पास: "धमाकों के शोर ने डराया।"
    इमरान कहते हैं कि अब रोज़ी-रोटी कमाना पीछे रह गया है, प्राथमिकता सिर्फ अपनी जान बचाना और परिवार के पास लौटना है।

 

  • सोहेल नरीन (अबु धाबी) – मोबाइल अलार्म पर भागना:
    सोहेल बताते हैं कि मिसाइल की सूचना मिलने पर फोन अलार्म बजता है और तुरंत सुरक्षित जगहों की ओर भागना पड़ता है।


परिजनों की दुआएं

जमशेदपुर में बैठे माता-पिता और भाई-बहन हर समय अपने बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। वे सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही किसी विशेष विमान या निकासी के रास्ते से उनके बच्चे सुरक्षित घर लौट सकेंगे।

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