Edited By Ramanjot, Updated: 16 Oct, 2026 02:05 PM

मामले की प्राथमिकी फुलवारी शरीफ थाना कांड संख्या 1142/ 2022 के रूप में भारतीय दंड विधान और तीन तलाक अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत दर्ज की गई थी। जांच के बाद पुलिस ने प्रथम द्दष्टया मामला सही पाते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
पटना: बिहार की राजधानी पटना की एक सत्र अदालत ने तीन तलाक देने के जुर्म में एक मुस्लिम पति को दो वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 6500 रुपए का जुर्माना भी किया।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन सहाय ने मामले में सुनवाई के बाद पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र स्थित सिमरी गांव निवासी नौशाद अहमद को भारतीय दंड विधान और तीन तलाक अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत दोषी करार देने के बाद यह सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोषी को एक माह बाइस दिन के कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी। जुर्माने की राशि वसूल होने पर पत्नी को दी जाएगी।
मामले की प्राथमिकी फुलवारी शरीफ थाना कांड संख्या 1142/ 2022 के रूप में भारतीय दंड विधान और तीन तलाक अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत दर्ज की गई थी। जांच के बाद पुलिस ने प्रथम द्दष्टया मामला सही पाते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस आरोप के अनुसार पीड़तिा की शादी दोषी के साथ वर्ष 2001 में हुई था। उनके तीन बच्चे भी थे। वर्ष 2022 में दोषी ने पीड़तिा को तीन तलाक दे दिया था। आरोप साबित करने के लिए अभियोजन ने इस मामले में तीन गवाहों का बयान अदालत में कलमबंद करवाया था।