Edited By Khushi, Updated: 22 Jan, 2026 05:19 PM

Jharkhand News: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक जैकेट चर्चा का विषय बन गई है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के दावोस सम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की एक तस्वीर सामने आने के बाद भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच सियासी घमासान तेज हो...
Jharkhand News: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक जैकेट चर्चा का विषय बन गई है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के दावोस सम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की एक तस्वीर सामने आने के बाद भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। मामला मुख्यमंत्री द्वारा पहनी गई जैकेट की कीमत को लेकर है, जिस पर अब राज्य की राजनीति गरमा गई है।
क्या है पूरा मामला
दरअसस, दावोस सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसके बाद भाजपा की झारखंड इकाई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने विदेश यात्रा के दौरान करीब 2.76 लाख रुपये की महंगी जैकेट पहनी है। भाजपा का कहना है कि जब राज्य की जनता गरीबी से जूझ रही है, तब मुख्यमंत्री का इस तरह का पहनावा गलत संदेश देता है। भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर कर दावा किया कि यह जैकेट लग्जरी ब्रांड Burberry की है, जिसकी कीमत लगभग 3,040 डॉलर बताई गई है। पोस्ट में तंज कसते हुए कहा गया कि निवेश लाने के नाम पर मुख्यमंत्री विदेश में महंगे कपड़ों में घूम रहे हैं।
JMM का पलटवार
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सरंगी ने कहा कि भाजपा बिना तथ्य जाने अफवाह फैला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक आदिवासी मुख्यमंत्री को वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ देखकर भाजपा असहज हो गई है। JMM नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो जैकेट पहनी है, उसका ब्रांड और कीमत को लेकर भाजपा के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। यह सब दावोस में हुए निवेश प्रस्तावों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
आदिवासी अस्मिता का मुद्दा
JMM नेता अमितेश सहाय ने इसे जातिवादी सोच बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़े पहनना अपराध है? उन्होंने यह भी कहा कि जब देश के बड़े नेता महंगे सूट और घड़ियां पहनते हैं, तब उन पर सवाल क्यों नहीं उठते। क्या आदिवासी नेताओं को अच्छे कपड़े पहनने का हक नहीं है?