डॉ. इरफान अंसारी ने हजारों जरूरतमंदों को बांटा कंबल, कहा- कोई मेरा बुरा करे वह उसका कर्म है, मैं किसी का...

Edited By Khushi, Updated: 04 Jan, 2026 12:18 PM

dr irfan ansari distributed blankets to thousands of needy people saying  if

Ranchi News: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, इंसानियत की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। हर साल की तरह इस साल भी भीषण ठंड को देखते हुए हमने हजारों जरूरतमंदों तक कंबल पहुंचाया है, ताकि कोई भी ठंड से बीमार न पड़े।

Ranchi News: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, इंसानियत की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। हर साल की तरह इस साल भी भीषण ठंड को देखते हुए हमने हजारों जरूरतमंदों तक कंबल पहुंचाया है, ताकि कोई भी ठंड से बीमार न पड़े। यह सेवा का संस्कार मैंने अपने पिता फुरकान अंसारी से सीखा है, जो हर पर्व, हर संकट में जनता के बीच जाकर उनकी मदद करते रहे हैं।

"जनता की सेवा पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ करें"
दरअसल, डॉ. अंसारी ने कड़ाके की ठंड को देखते जामताड़ा विधानसभा अंतर्गत पंचायत झिलुआ, पबिया, बाकुडीह, केन्दुआटांड़, बसपहाड़ी, पिपलाटांड़, उदयपुर, बगरूडीह और महेशपुर सहित कई गांवों में लगभग 8,000 कंबलों का वितरण किया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने कहा, कि ठंड में कोई भी गरीब, असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति बीमार न पड़े, यही हमारी प्राथमिकता है। सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। मैंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से कहा है कि जनता की सेवा पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ करें। विपक्ष की बातों में उलझने के बजाय जनता की आवाज सुनें और उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहें। जनता आज उनके काम से खुश है और यही सबसे बड़ी पूंजी है।'

"ठंड से किसी की जान बचाना सबसे बड़ा दान है"
डॉ. अंसारी ने भावुक स्वर में कहा कि मैं विश्वास, मेहनत और लगन से जनता की सेवा कर रहा हूं। जब भी जनता को मेरी आवश्यकता होती है, मैं बिना बुलाए पहुंचता हूं। हजारों लोगों की दुआएं और आशीर्वाद ही मुझे भीतर से मजबूत बनाते हैं और ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा देते हैं। जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा-इस सिद्धांत पर मेरा पूरा विश्वास है। डॉ. इरफान अंसारी ने विपक्ष पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कुछ लोग कहते हैं कि मैं कंबल, साड़ी या वस्त्र बांटता हूं। मैं उनसे कहना चाहता हूं- ठंड से किसी की जान बचाना सबसे बड़ा दान है। जब कोई गरीब इस कंबल से ठंड से बच पाएगा और मेरे पिता फुरकान अंसारी का नाम लेगा, वही मेरी असली पूंजी है।' 

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