वरिष्ठ IAS अधिकारी समेत 7 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल, टेंडर घोटाले में SVU की बड़ी कार्रवाई

Edited By Ramanjot, Updated: 25 Jun, 2026 11:59 AM

chargesheet filed against seven accused including ias officer sanjeev hans

एसवीयू के बयान के अनुसार, जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सरकारी गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, रिशु श्री सरकारी विभागों में...

Bihar News: बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बहुचर्चित निविदा घोटाला मामले में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव व आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत सात आरोपियों के खिलाफ बुधवार को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपपत्र में ठेकेदार रिशु श्री, मुमुक्षु कुमार चौधरी, तारिणी दास, उमेश कुमार सिंह, संतोष कुमार और पवन कुमार के नाम शामिल हैं। 

एसवीयू के बयान के अनुसार, जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सरकारी गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, रिशु श्री सरकारी विभागों में निविदा और बिल भुगतान के बदले अधिकारियों को 2 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन देता था। बयान में कहा गया है कि जांच के दौरान पता चला कि संजीव हंस के जल संसाधन विभाग में सचिव रहने के दौरान कोसी बेसिन विकास परियोजना से जुड़े कार्यों में अनियमितताएं हुईं और रिशु श्री की कंपनियों से कमीशन लेने के साक्ष्य मिले हैं। एसवीयू के अनुसार, पिछले सात-आठ वर्षों में अवैध कमाई से रिशु श्री ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पटना और बिहार के विभिन्न स्थानों पर बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की। 

एसवीयू ने बताया कि छापेमारी में उसके ठिकानों से 53.5 लाख रुपए नकद, 2.13 करोड़ रुपए के आभूषण, करीब 58.58 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन से जुड़े दस्तावेज और कई महंगे वाहन बरामद किए गए थे। एसवीयू के अनुसार यह आरोप भी है कि विभिन्न विभागों में निविदा दिलाने के लिए रिश्वत का नेटवर्क संचालित किया गया। इसी मामले में एसवीयू ने सातों आरोपियों के विरुद्ध 23 जून को आरोपपत्र दाखिल किया। उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हंस और कारोबारी रिशु श्री से जुड़ा कथित " निविदा घोटाला" मुख्य रूप से सरकारी ठेकों में अनियमितता, रिश्वतखोरी और धनशोधन के आरोपों से संबंधित है। जांच एजेंसियों का दावा है कि हंस के कार्यकाल के दौरान कुछ ठेकों और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं हुईं। वहीं, रिशु श्री पर इन कथित लेन-देन और निवेशों से जुड़े होने का आरोप है। 

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