महिलाओं के लिए मददगार साबित हो रही Maiyan Samman Yojana, गांव के लिए मिसाल बन गईं झारखंड की मेरी किंडो

Edited By Khushi, Updated: 13 Feb, 2026 11:43 AM

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Jharkhand News: झारखंड के सिमडेगा जिले की एक महिला ने स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं की मदद से अपनी किस्मत बदल दी। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और सही मार्गदर्शन से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया और गांव के लिए मिसाल बन...

Jharkhand News: झारखंड के सिमडेगा जिले की एक महिला ने स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं की मदद से अपनी किस्मत बदल दी। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और सही मार्गदर्शन से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया और गांव के लिए मिसाल बन गईं।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं मेरी किंडो
दरअसल, जिले के केरसई प्रखंड अंतर्गत रायबेरा गांव (पंचायत बाघडेगा) की रहने वाली मेरी किंडो आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वर्ष 2017 में वे झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के तहत संत मोनिका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें समूह का सचिव बनाया गया। समूह में रहते हुए मेरी किंडो नियमित बैठकों का संचालन करती हैं, बचत जमा करवाती हैं और अन्य गतिविधियों में अहम भूमिका निभाती हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आय केवल बारिश पर निर्भर धान की खेती और मजदूरी से होती थी, जिससे घर की आर्थिक स्थिति स्थिर नहीं थी। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता के साथ खेती और पशुपालन का प्रशिक्षण भी मिला। वर्ष 2024-25 के रबी सीजन में उन्होंने समूह से 30 हजार रुपये का ऋण लिया और कुएं से सिंचाई की सुविधा के जरिए पत्ता गोभी, टमाटर और आलू की खेती की। इस खेती से उन्हें 85,900 रुपये की आय हुई।

मेरी किंडो का परिवार कई आय स्रोतों के सहारे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा
इसके अलावा उन्होंने बकरी पालन भी शुरू किया, जिससे 35,600 रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई। इस तरह कुल मिलाकर उन्होंने 1,21,500 रुपये की आय अर्जित की और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। मेरी किंडो को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत अब तक 34 हजार रुपये मिल चुके हैं। इसमें से 25 हजार रुपये उन्होंने दोबारा खेती और पशुपालन में निवेश किए। उनकी सफलता से गांव के अन्य लोग भी सब्जी खेती और पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। मेरी किंडो की तीन बेटियां हैं। एक बेटी नर्स के रूप में काम कर रही है, जबकि दो बेटियां रांची में उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं। परिवार बच्चों की पढ़ाई को सबसे अधिक महत्व देता है। स्वयं सहायता समूह, सरकारी योजनाओं और अपनी मेहनत के दम पर आज मेरी किंडो का परिवार कई आय स्रोतों के सहारे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

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